Friday, November 6, 2026

कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 9 // न्याय

 

कक्षा – 5  // हिन्दी // पाठ - 9 // न्याय

पाठ का सारांश 

न्याय पाठ विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखित एक सुंदर नाटक है। इसमें भगवान बुद्ध के बचपन की एक प्रसिद्ध घटना के माध्यम से दया, करुणा, प्रेम, अहिंसा और न्याय का महत्त्व समझाया गया है।

एक दिन राजकुमार सिद्धार्थ अपने मित्र के साथ राज-उद्यान में बैठे प्रकृति की सुंदरता का आनंद ले रहे थे। तभी उन्होंने आकाश में उड़ते हुए सुंदर राजहंसों को देखा। अचानक देवदत्त ने एक राजहंस पर तीर चला दिया। तीर लगने से राजहंस घायल होकर धरती पर गिर पड़ा।

सिद्धार्थ ने घायल राजहंस को अपनी गोद में उठा लिया और उसके शरीर से तीर निकालकर उसकी देखभाल की। उन्होंने अपने मित्र से राजवैद्य को बुलाकर मरहम लाने के लिए कहा।

कुछ देर बाद देवदत्त वहाँ आया और राजहंस को अपना बताते हुए सिद्धार्थ से वापस माँगने लगा। उसका कहना था कि उसने राजहंस का शिकार किया है, इसलिए उस पर उसका अधिकार है। लेकिन सिद्धार्थ ने राजहंस को देने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि देवदत्त ने उसे घायल किया है, जबकि उन्होंने उसकी जान बचाई है।

दोनों के बीच विवाद बढ़ने पर वे न्याय के लिए महाराज शुद्धोदन की सभा में पहुँचे। महाराज ने दोनों की बातें सुनीं। सिद्धार्थ ने कहा कि बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है और जो व्यक्ति किसी की शरण में आए, उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

तब मंत्री ने एक बहुत अच्छा उपाय सुझाया। उन्होंने राजहंस को सभा में एक आसन पर बैठाया और पहले देवदत्त को उसे अपने पास बुलाने के लिए कहा। राजहंस डरकर उसके पास नहीं गया। इसके बाद सिद्धार्थ ने प्रेम से उसे पुकारा तो वह तुरंत उनकी गोद में आ गया।

इस प्रकार राजहंस ने स्वयं सिद्ध कर दिया कि वह सिद्धार्थ के पास रहना चाहता है। महाराज ने मंत्री के निर्णय को स्वीकार करते हुए राजहंस को सिद्धार्थ के पास रहने की आज्ञा दी।

शिक्षा: हमें सभी जीव-जंतुओं से प्रेम करना चाहिए। किसी को चोट पहुँचाना गलत है। सच्चा अधिकार उसी का है जो दूसरों की रक्षा करता है। दया, करुणा और अहिंसा मनुष्य के श्रेष्ठ गुण हैं।

पाठ का मुख्य संदेश – 

1. हमें घायल पशु-पक्षियों की सहायता करनी चाहिए।

2. किसी भी निर्दोष जीव को चोट नहीं पहुँचानी चाहिए।

3. दूसरों पर अपनी धौंस नहीं जमानी चाहिए।

4. विवाद होने पर निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए।

5. प्रेम और दया से दूसरों का विश्वास जीता जा सकता है।

6. सच्ची वीरता कमजोर और असहाय लोगों की रक्षा करने में है।

शब्दार्थ :-

राजकुमार -राजा का पुत्र

वाक्य: राजकुमार ने गरीब बच्चे की सहायता की।

उद्यान - बगीचा

वाक्य: बच्चे विद्यालय के उद्यान में खेलते हैं।

सुहावना-अच्छा और सुखद

वाक्य: आज मौसम बहुत सुहावना है।

व्याकुल- बेचैन

वाक्य: माँ अपने बच्चे के देर से आने पर व्याकुल हो गई।

अचरज-  आश्चर्य

वाक्य: हाथी को देखकर बच्चे अचरज में पड़ गए।

निर्दयी - दया न करने वाला

वाक्य: हमें निर्दयी व्यक्ति नहीं बनना चाहिए।

घायल - चोट लगा हुआ

वाक्य: सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।

करुणा - दया और सहानुभूति

वाक्य: हमें गरीबों के प्रति करुणा रखनी चाहिए।

अनुराग- प्रेम और लगाव

वाक्य: बच्चों को अपने माता-पिता से अनुराग होता है।

निर्दोष- जिसने कोई अपराध न किया हो

वाक्य: निर्दोष व्यक्ति को दंड नहीं देना चाहिए।

आखेट- शिकार

वाक्य: जंगल में जंगली जानवरों का आखेट करना गलत है।

धौंस- डर दिखाकर दबाव डालना

वाक्य: हमें किसी पर अपनी धौंस नहीं जमानी चाहिए।

विवश- मजबूर

वाक्य: बारिश के कारण हम घर में रहने को विवश हो गए।

निवेदन- विनम्रतापूर्वक कहना

वाक्य: छात्र ने प्रधानाचार्य से निवेदन किया।

सजल - आँसुओं से भरा

वाक्य: विदाई के समय माँ की आँखें सजल हो गईं।

स्तंभित- आश्चर्यचकित

वाक्य: जादू का खेल देखकर सभी स्तंभित रह गए।

शरणागत - शरण में आया हुआ

वाक्य: हमें शरणागत व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।

पर्यायवाची शब्द

शब्द           पर्यायवाची शब्द

न्याय        इंसाफ, न्‍यायोचित फैसला

मित्र        सखा, दोस्त, मीत

पक्षी        खग, विहंग, पंछी

आकाश    नभ, गगन, अंबर

धरती       पृथ्वी, भूमि, धरा

सूर्य       रवि, भानु, दिनकर

जल      पानी, नीर, वारि

वन      जंगल, अरण्य, कानन

राजा      नरेश, भूप, महाराज

प्रेम      स्नेह, अनुराग, प्यार

करुणा  दया, कृपा, सहानुभूति

आँख      नेत्र, नयन, लोचन

शरीर      तन, देह, काया

प्रसन्न  खुश, आनंदित, हर्षित

सुंदर       मनोहर, आकर्षक, खूबसूरत

आज्ञा  आदेश, हुक्म, निर्देश

विलोम शब्द 

शब्द      विलोम शब्द

सुंदर        कुरूप

प्रसन्न   उदास

शांत      अशांत

प्रेम      घृणा

दया      निर्दयता

निर्दोष  दोषी

घायल    स्वस्थ

मित्र      शत्रु

आगे     पीछे

ऊपर     नीचे

आना     जाना

सुबह     शाम

दिन     रात

सरल     जटिल

बड़ा     छोटा

हर्ष    शोक

वीर   कायर

अपना पराया

जीवन मृत्यु

बचाना  मारना

लिंग परिवर्तन 

पुल्लिंग       स्त्रीलिंग

राजकुमार      राजकुमारी

राजा             रानी

महाराज        महारानी

मित्र            सखी

पुत्र           पुत्री

बालक     बालिका

लड़का    लड़की

बेटा          बेटी

भाई        बहन

सेवक   सेविका

अध्यापक   अध्यापिका

मालिक   मालकिन

नायक   नायिका

मोर       मोरनी

घोड़ा          घोड़ी

शेर         शेरनी

एकवचन एवं बहुवचन 

एकवचन         बहुवचन

पक्षी               पक्षी

राजहंस         राजहंस

बच्चा          बच्चे

गाय              गायें

बछड़ा         बछड़े

आँख          आँखें

बात           बातें

वस्तु           वस्तुएँ

किरण      किरणें

चिड़िया     चिड़ियाँ

माता           माताएँ

नदी          नदियाँ

सभा          सभाएँ

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