Saturday, August 1, 2026

कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 4 // साङकेन

 

कक्षा – 5  // हिन्दी // पाठ - 4 //  साङकेन

पाठ का सारांश

इस अध्याय में अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध साङकेन त्योहार का सुंदर वर्णन किया गया है। वल्लरी के पिताजी का स्थानांतरण दिल्ली से अरुणाचल प्रदेश के चौखाम में हो जाता है। वल्लरी वहाँ के शांत वातावरण, हरियाली और लोगों के प्रेमपूर्ण व्यवहार को देखकर बहुत प्रसन्न होती है।

एक दिन वल्लरी अपने मित्र चाऊतान के घर जाती है। वहाँ उसका गर्मजोशी से स्वागत किया जाता है और उसे स्वादिष्ट पकवान खिलाए जाते हैं। उसी समय गाँव में भगवान बुद्ध की मूर्तियों की शोभायात्रा निकाली जाती है। सभी लोग उत्साहपूर्वक नाचते-गाते हुए मूर्तियों को नए बने मंदिर तक ले जाते हैं।

मंदिर को बाँस की खपच्चियों, हरी टहनियों और रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। बौद्ध भिक्षु मंत्रोच्चार करके मूर्तियों की पूजा करते हैं। इसके बाद लोग एक-दूसरे पर पानी डालते हैं और चावल का आटा लगाते हैं। यह देखकर वल्लरी को अपने यहाँ मनाई जाने वाली होली की याद आती है। चाऊतान उसे बताता है कि साङकेन उनके नए वर्ष का त्योहार है।

वल्लरी बताती है कि उनके यहाँ भी होली के अवसर पर लोग रंग खेलते हैं, एक-दूसरे से मिलते हैं और अतिथियों का स्वागत करते हैं। चाऊतान भी अपने परिवार की त्योहार की परंपराओं के बारे में बताता है। तीन दिन तक साङकेन उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। अंतिम दिन मूर्तियों को फिर से बौद्ध विहार में ले जाया जाता है और भिक्षु सभी को सुख, समृद्धि, अच्छी खेती तथा निरोग जीवन का आशीर्वाद देते हैं।

मुख्य संदेश

यह अध्याय हमें सिखाता है कि भारत विविध संस्कृतियों और त्योहारों का देश है। अलग-अलग राज्यों के त्योहार भले ही अलग हों, लेकिन उनका उद्देश्य प्रेम, भाईचारा, मेल-मिलाप, प्रकृति के प्रति सम्मान और नए वर्ष का स्वागत करना है। हमें सभी संस्कृतियों और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए.

शब्द

अर्थ

वाक्य

अधिकारी

अफ़सर

मेरे पिताजी एक अधिकारी हैं।

वातावरण

आस-पास का माहौल

विद्यालय का वातावरण स्वच्छ है।

हरियाली

हरापन

वर्षा ऋतु में चारों ओर हरियाली छा जाती है।

शोभायात्रा

शोभायात्रा / जुलूस

त्योहार पर शोभायात्रा निकाली गई।

पालकी

डोली

मूर्ति को पालकी में रखा गया।

मूर्ति

प्रतिमा

मंदिर में भगवान की मूर्ति है।

उत्साह

जोश

बच्चों ने उत्साह से खेल खेला।

विहार

बौद्ध मठ

भिक्षु विहार में रहते हैं।

सम्मिलित

शामिल

सभी छात्र कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

आशीर्वाद

आशीर्वाद

दादा-दादी ने मुझे आशीर्वाद दिया।

खपच्चियाँ

बाँस की पतली पट्टियाँ

बाँस की खपच्चियों से सजावट की गई।

एकत्रित

इकट्ठा

सभी लोग मैदान में एकत्रित हुए।

भिक्षु

भिक्षु / साधु

भिक्षु ने सबको शांति का संदेश दिया।

स्वागत

स्वागत

अतिथियों का स्वागत किया गया।

स्वादिष्ट

स्वादिष्ट

माँ ने स्वादिष्ट भोजन बनाया।

भीड़भरी

भीड़भरा

दिल्ली की सड़कें भीड़भरी हैं।

कतार

पंक्ति

बच्चे कतार में खड़े हैं।

शांत

शांत

गाँव का वातावरण शांत है।

मुस्कान

मुस्कान

उसकी मुस्कान प्यारी है।

पकवान

विशेष व्यंजन

त्योहार पर कई पकवान बने।

प्रसन्न

प्रसन्न

सभी बच्चे प्रसन्न थे।

किनारा

तट / किनारा

नदी के किनारे पेड़ हैं।

प्रतिदिन

प्रतिदिन

मैं प्रतिदिन पढ़ाई करता हूँ।

पूजा

पूजा

सभी ने पूजा की।

त्योहार

त्योहार

होली रंगों का त्योहार है।

आरंभ

आरंभ

कार्यक्रम का आरंभ हुआ।

अतिथि

अतिथि

अतिथि हमारे घर आए।

नमकीन

नमकीन

मुझे नमकीन पसंद है।

प्रणाम

प्रणाम

मैंने गुरुजी को प्रणाम किया।

खेती

कृषि

किसान खेती करते हैं।

 


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