Thursday, July 23, 2026

कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 3 // चाँद का कुरता

 

कक्षा – 5  // हिन्दी // पाठ - 3 //  चाँद का कुरता

पाठ का सारांश

लेखक – रामधारी सिंह 'दिनकर'

इस कविता में कवि ने कल्पना की है कि चाँद सर्दी से परेशान होकर अपनी माँ से ऊन का मोटा झिंगोला (कुरता) सिलवाने की ज़िद करता है। वह कहता है कि ठंडी हवा के कारण उसे बहुत ठंड लगती है और आसमान की यात्रा करते समय उसे कठिनाई होती है। इसलिए वह अपनी माँ से गरम कुरता सिलवाने की विनती करता है।

चाँद की माँ उसे प्यार से समझाती है कि उसका आकार प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी वह बहुत छोटा दिखाई देता है, कभी बड़ा हो जाता है और कभी बिल्कुल दिखाई ही नहीं देता। ऐसे में उसका सही नाप लेना संभव नहीं है। बिना सही नाप के ऐसा कुरता नहीं सिला जा सकता जो उसे हर दिन ठीक से आए।

यह सुनकर चाँद अपनी ज़िद छोड़ देता है। इस कविता के माध्यम से कवि ने चाँद के घटते-बढ़ते आकार को बहुत ही रोचक, हास्यपूर्ण और कल्पनाशील ढंग से प्रस्तुत किया है। साथ ही बच्चों को यह संदेश भी दिया है कि हर ज़िद पूरी नहीं हो सकती और हमें बड़ों की बात समझकर माननी चाहिए। 

 शब्दार्थ :-

(शब्द)

 (अर्थ)

 (वाक्य)

हठ

ज़िद

रिया ने नया खिलौना लेने की हठ की।

झिंगोला

मोटा ऊनी कुरता या वस्त्र

सर्दी में दादी ने मुझे ऊन का झिंगोला पहनाया।

ठिठुरना

ठंड से काँपना

बच्चे ठंड में ठिठुर रहे थे।

सफर

यात्रा

हमारा सफर बहुत आनंददायक रहा।

जाड़ा

सर्दी का मौसम

जाड़े में हमें गर्म कपड़े पहनने चाहिए।

भाड़ा

किराया

हमने बस का भाड़ा समय पर दिया।

कुशल

सुरक्षित एवं स्वस्थ

भगवान सभी को कुशल रखें।

टोना

जादू-टोना

हमें टोना-टोटका जैसी बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

अंगुल-भर

एक उँगली जितना

उसने अंगुल-भर जगह में पौधा लगाया।

घटता

कम होना

गर्मियों में तालाब का पानी घटता है।

बढ़ता

अधिक होना

बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ता है।

नाप

माप

दर्जी ने मेरी शर्ट का नाप लिया।

सिलवाना

सिलने के लिए देना

माँ ने मेरे लिए नया कुर्ता सिलवाया।

मौसम

ऋतु या वातावरण

आज का मौसम बहुत सुहावना है।

दिखाई पड़ना

नज़र आना

रात में आकाश में अनेक तारे दिखाई पड़ते हैं।

सलोना

सुंदर और आकर्षक

सलोना चाँद सभी का मन मोह लेता है।

बदलना

परिवर्तन होना

चाँद का आकार प्रतिदिन बदलता है।

प्रतिदिन

हर दिन

हमें प्रतिदिन समय पर पढ़ाई करनी चाहिए।

गायब

दिखाई देना

बादलों में चाँद गायब हो गया।

आसमान

आकाश

आसमान में इंद्रधनुष बहुत सुंदर दिखाई दे रहा था।

बातचीत के लिए

1. आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों ?

उत्तर: मुझे आकाश सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बहुत सुंदर दिखाई देता है। इस समय सूरज की किरणों के कारण आकाश रंग-बिरंगा होता है, जो देखने में बहुत सुंदर लगता है।

आकाश हमें बारिश के बाद बहुत सुंदर दिखाई देता है क्योंकि उस समय आकाश में इंद्रधनुष दिखाई देते हैं।

(विद्यार्थी अपनी पसंद व अनुभव के आधार पर अन्य उत्तर लिख सकते हैं ।)

2. चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से  कपड़े माँगेगा?

उत्तर: चाँद को ठंड लगती है, वहीं सूरज को बहुत गर्मी लगती है इसलिए वह अपनी माँ से ठंडे और हल्के कपडे माँगेगा।

 3. आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं?

उत्तर: आकाश में अनेक प्रकार के परिवर्तन होते हैं। मैंने आकाश में रंगों का बदलना, दिन-रात का अंतर, बादलों का आना-जाना और कभी-कभी इंद्रधनुष देखे हैं।

(विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर अन्य उत्तर लिख सकते हैं ।)

4. जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं?

उत्तर: नए कपड़े खरीदते समय मैं उनके आकार, कपड़े की गुणवत्ता, मौसम के अनुसार उपयुक्तता और कीमत का ध्यान रखता हूँ।

कपड़ा आरामदायक हो, सही नाप, रंग अच्छा, दाम ठीक हो, मौसम के अनुसार हो आदि । (विद्यार्थी अपने अनुभव के आधार पर भी उत्तर लिख सकते हैं ।)

कविता से

नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प हैं। इनमें एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं। सही विकल्प पर चाँद का चित्र  बनाइए –
1. चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है?
(क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं।
(
ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।
(
ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है।
(
घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।
उत्तर:
(ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है।

2. कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
    (क) एक अंगुल – भर चौड़ा         (ख) एक फुट मोटा
   (
ग) किसी दिन बड़ा                      (घ) किसी दिन छोटा
उत्तर:
(क) एक अंगुल – भर चौड़ा 

(ख) एक फुट मोटा 
(
ग) किसी दिन बड़ा 
(
घ) किसी दिन छोटा 

3. कविता में ठंड के मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?
    (क) ऊन का मोटा झिंगोला                       (ख) सन सन चलती हवा
     (
ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा                          (घ) भाड़े का कुरता
उत्तर:
(क) ऊन का मोटा झिंगोला 
(
ख) सन सन चलती हवा 
(
ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा 

सोचिए और लिखिए

1. कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिल्कुल दिखाई नहीं देता है?
उत्तर: घटता-बढ़ता रोज, किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखाई पड़ता है।”
इन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिल्कुल दिखाई नहीं देता है।

2. सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?
उत्तर: सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त स्वेटर, जैकेट, मफलर, शॉल, जुराबें, टोपी आदि कपड़े माँग सकता है। इसके अलावा चाँद अपनी माँ से रजाई, कंबल आदि भी माँग सकता है, जिससे उसे सर्दी न लगे।

3. जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है?
उत्तर: जाड़े के मौसम में ठंडी हवा चलती है, जिसके कारण चाँद को रातभर बहुत सर्दी लगती है। वह काँपते हुए अपनी यात्रा पूरी करता है।

4. चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है?
उत्तर: चाँद अपनी रातभर की आकाश की यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है। चाँद एक उपग्रह है, जो 28 दिन में पृथ्वी की एक परिक्रमा करता है।

अभिभावक और आप 

जब नीचे दी गई बातें एवं घटनाएँ होती हैं, तब आपके अभिभावक क्या-क्या कहते या करते हैं? अपने-अपने अनुभव कक्षा में साझा कीजिए।
जब आप ठंडी रात में सोते समय अपने पैरों से कंबल या रजाई उतार फेंकते हैं।
जब आप ठंड में आइसक्रीम खाने का हठ करते हैं।
जब आप दूध पीने, हरी सब्जियाँ और फल आदि खाने से कतराते हैं।
जब आप देर तक सोते हैं।
कोई आपके घर आपकी शिकायत करने आता है।
जब आपके अच्छे कामों के लिए आपकी प्रशंसा होती है अथवा पुरस्कार मिलता है।
उत्तर:
जब मैं कंबल या रजाई उतार देता हूँ, तो मेरे अभिभावक मुझे ढक देते हैं और सर्दी से बचने की सलाह देते हैं।
जब हम ठंड में आइसक्रीम खाने का हठ करते हैं तो वे हमें मना करते है क्योंकि इससे गला खराब होता है।

जब मैं दूध, हरी सब्जियाँ और फल खाने से कतराता हूँ, तो वे मुझे इनके फायदे समझाकर खाने के लिए प्रेरित करते हैं।
जब मैं देर तक सोता हूँ, तो वे मुझे समय पर उठने की आदत डालने को कहते हैं। हमें जगाते है तथा जल्दी उठने का लाभ बताते हैं।
जब कोई मेरी शिकायत करने आता है, तो वे मुझे समझाते हैं और अपनी गलती सुधारने को कहते हैं।
जब मेरे अच्छे कामों के लिए मेरी प्रशंसा होती है या पुरस्कार मिलता है, तो वे खुश होते हैं और मुझे प्रोत्साहित करते हैं। वे हम पर गर्व करते हैं तथा हमें बधाई देते हैं।

अनुमान और कल्पना

1. आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे?
उत्तर: मैं अपनी माँ से कहूँगा कि चाँद के पास पहनने के लिए गरम  कपड़े नहीं हैं। रात के समय जब ठंडी हवाएँ चलती हैं, तो उसे बहुत ठंड लगती है और उसे ठिठुर-ठिठुरकर आकाश की यात्रा करनी पड़ती है। चाँद का आकार हर दिन घटता-बढ़ता रहता है, जिसके कारण उसकी माँ उसके लिए कपड़े नहीं सिलवा पाती हैं।

2. गरमी और वर्षा से बचने के लिए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह किस प्रकार के कपड़ों एवं वस्तुओं की माँग कर सकता है?
उत्तर: चाँद अपनी माँ से कहेगा कि उसे गरमी से बचने के लिए हल्के और ठंडक देने वाले कपड़े तथा वर्षा से बचने के लिए रेनकोट और छाता चाहिए। वह सूती कपड़े, टोपी, रेनकोट और छाता जैसी वस्तुओं की माँग कर सकता है।

3. चाँद ने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए क्यों कहा होगा ?
उत्तर: चाँद के लिए कुरता सिलना एक कठिन कार्य है क्योंकि उसका आकार हर दिन घटता-बढ़ता रहता है। इसी कारण उसने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए कहा होगा, ताकि वह उसे जरूरत के अनुसार बदल सके।

4. यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता तो क्या होता?
उत्तर: यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता, तो वह उसे हर दिन नहीं पहन सकता था क्योंकि चाँद का आकार हर दिन बदल जाता है, जिसके कारण उसे हर दिन अलग आकार के कपड़े चाहिए।

भाषा की बात

1. सन- सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ ।” कविता की इस पंक्ति में ‘भर’ शब्द का प्रयोग किया गया है। अब आप ‘भर’ की सहायता से पाँच वाक्य अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए, जैसे-पानीं गिलास भर है, उसने दिन भर पढ़ाई की आदि ।
उत्तर:
(i) वह रात भर जागता रहा।
(ii)
बच्चे दिन भर बगीचे में खेलते रहे।
(iii)
उसने साल भर परीक्षा पास करने के लिए पढ़ाई की।
(iv)
राजू ने क्षण भर में ही प्रश्न का उत्तर लिख दिया।
(v)
उसने पूरी थाली भर खाना खाया।

(vi) प्रधानमंत्री ने देश भर के विद्यार्थियों को संबोधित किया ।
(vii
) रंजीता ने पेट भर के खाना खाया।
(viii
) गाँव भर में डेंगू की सूचना दी गई।
(
विद्यार्थी इस प्रकार के अन्य वाक्य भी बना सकते हैं।)

2. नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यान पढ़िए-
(क) “ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ। ”
(
ख) “ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ। ”
अपनी बात पर बल देने के लिए हम इस प्रकार के कुछ शब्दों का प्रयोग दो बार करते हैं, जैसे- जल्दी चलो, जल्दी-जल्दी चलो आदि। अब आप ऐसे ही पाँच वाक्य अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।
उत्तर:
(i) वह डर-डरकर अँधेरे रास्ते पर चल रहा था।
(ii)
बच्चे कूद-कूदकर खुशी जाहिर कर रहे थे।
(iii)
वह सोच-समझकर अपना निर्णय लेता है।
(iv)
सैनिक लड़-लड़कर देश की रक्षा करते हैं।
(v)
वह हँस-हँसकर अपनी परेशानी छिपा रहा था।

3. नीचे दी गई कविता की पंक्तियों में संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया पहचानकर उन्हें दिए गए स्थानों में लिखिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

उत्तर:


चाँद का झिंगोला

1. मान लीजिए कि चाँद, झिंगोले के लिए माँ, कपड़े के दुकानदार और दर्ज़ी से संवाद करता है। बातचीत के कुछ अंश नीचे दिए गए हैं। आप इन्हें आगे बढ़ाइए। आप संवाद अपनी मातृभाषा में भी लिख सकते हैं।

चाँद और माँ का संवाद

चाँद: माँ, मुझे बहुत ठंड लगती है। मेरे लिए एक मोटा झिंगोला सिलवा दो!
माँ : तुझे सच में ठंड सताती होगी लेकिन एक समस्या है।
चाँद: समस्या? कैसी समस्या, माँ?
माँ : तेरा आकार तो प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी छोटा, कभी बड़ा, कभी एकदम गायब! मैं कैसे नाप लूँ?
चाँद: (सोचकर) अरे हाँ! लेकिन फिर भी कोई उपाय तो होगा?
माँ : ……………………………………..
चाँद : ……………………………………
माँ : ……………………………………..
चाँद : ……………………………………
उत्तर:
माँ : क्यों न हम कपड़े के दुकानदार से सलाह लें?
चाँद : हाँ माँ, यह ठीक रहेगा।
माँ : अगर दुकानदार हमारी मदद न कर पाए, तो हम दर्ज़ी के पास जाएँगे।
चाँद : ठीक है माँ।

कपड़े

चाँद और कपड़े का दुकानदार

चाँद: दुकानदार जी, मुझे एक गरम कपड़ा चाहिए जिससे मेरी सर्दी दूर हो जाए।
दुकानदारः अवश्य, कितने मीटर चाहिए?
चाँद: यही तो समस्या है! मैं कभी छोटा होता हूँ, कभी बड़ा। आप ही बताइए… कितने मीटर लूँ?
दुकानदार: (हँसकर) अरे छोटू चाँद ! जब आपका नाप ही तय नहीं तो कपड़ा कैसे दूँ? पहले नाप तो तय करके आओ!
चाँदः ………………………………………………..
दुकानदार: ………………………………………………..
चाँद: ………………………………………………..
दुकानदार: ………………………………………………..
चाँद: ………………………………………………..
उत्तर:
चाँद : आप ही कोई उपाय बताइए न, जिससे मेरा काम हो जाए।
दुकानदार : अच्छा, तुम ऐसा करो कि थोड़ा ढीला-ढाला और खिंचने वाला कपड़ा ले लो।
चाँद : यह तो अच्छा विचार है, इसे मैं हर दिन आराम से पहन सकूँगा।
दुकानदार : हाँ, और तुम इसे दर्ज़ी से अपने अनुसार सिलवा लेना।
चाँद : धन्यवाद दुकानदार जी, आपने मेरी समस्या का अच्छा समाधान बताया।

 

चाँद और दर्जी का संवाद

चाँद: दर्ज़ी जी, मेरे लिए एक कुरता सिल दीजिए।
दर्ज़ी: बिलकुल! लेकिन पहले नाप तो दो।
चाँद: यही तो समस्या है! कभी मैं छोटा, कभी बड़ा हो जाता हूँ।
दर्ज़ी: (हँसते हुए) तो फिर ऐसा करो, प्रतिदिन मेरे पास आओ और मैं प्रत्येक दिन तुम्हारे नाप का नया कुरता सिल दूँगा!
चाँदः (प्रसन्न होते हुए) फिर तो मुझे प्रतिदिन नए कपड़े मिलेंगे! लेकिन माँ मानेंगी नहीं!
दर्ज़ी: ………………………
चाँदः ………………………
दर्ज़ी: ………………………
चाँदः ………………………
उत्तर:
दर्ज़ी: तो फिर ऐसा करते हैं, मैं तुम्हारे लिए ढीला-ढाला और खिंचने वाला कुरता सिल देता हूँ।
चाँद: यह तो बहुत अच्छा उपाय है! इससे मुझे रोज नया कुरता सिलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दर्ज़ी: हाँ, और तुम आराम से अपनी यात्रा भी पूरी कर सकोगे।
चाँद: धन्यवाद दर्ज़ी जी, आपने मेरी समस्या हल कर दी।

कविता से आगे

1. क्या चाँद की तरह आप भी अपनी माँ से किसी वस्तु के लिए हठ करते हैं? आप अपनी माँ को इसके लिए कैसे मनाते हैं?
उत्तर: हाँ, कभी-कभी मैं भी अपनी माँ से किसी वस्तु के लिए हठ करता हूँ। मैं उन्हें प्यार से अपनी जरूरत बताता हूँ और उसके फायदे समझाता हूँ। मैं यह भी वादा करता हूँ कि मैं उस वस्तु का सही उपयोग करूँगा। इस तरह माँ मेरी बात मान जाती हैं।

हम अपनी माँ से कभी – कभी चॉकलेट के लिए ज़िद करते हैं, हम उन्हें कहते है कि चॉकलेट कम खाएँगे तथा उसे खाकर हम कुल्ला करेंगे ताकि हमारे दाँत खराब न हो। इससे हमारी माता जी मान जाती हैं।

(विद्यार्थी अपने अनुभवों के आधार पर स्वयं उत्तर दें ।)

2. आपकी माँ आपको किसी काम के लिए कैसे मनाती हैं?
उत्तर: मेरी माँ मुझे किसी काम के लिए प्यार से समझाती हैं और उस काम का महत्व बताती हैं। वे मुझे अच्छे से समझाकर प्रेरित करती हैं और कभी-कभी उदाहरण देकर भी समझाती हैं।

(विद्यार्थी अपने अनुभवों के आधार पर स्वयं उत्तर दें ।)

3. गरमी, सर्दी या वर्षा से बचने के लिए आपकी माँ आपको क्या कहती अथवा क्या – क्या करती हैं?
उत्तर: गरमी, सर्दी या वर्षा से बचने के लिए मेरी माँ मुझे मौसम के अनुसार कपड़े पहनने को कहती हैं। सर्दी में वे मुझे गरम कपड़े पहनाती हैं, गरमी में हल्के और सूती कपड़े पहनने को कहती हैं, और वर्षा में छाता या रेनकोट लेने की सलाह देती हैं ताकि मैं बीमार न पड़ूँ।

सोचिए, समझिए और बताइए

1. कविता में चाँद अपनी माँ से बातें कर रहा है। मान लीजिए कि चाँद बोल नहीं सकता। अब वह अपनी माँ को अपनी बात कैसे बताएगा ?
उत्तर: यदि चाँद बोल नहीं सकता तो वह अपनी माँ को अपनी बात संकेतों के माध्यम से बता सकता है। चाँद अपनी माँ को अपनी बात इशारों और हाव-भाव के माध्यम से बताएगा। इसके अलावा वह लिखकर भी अपनी बातों को कह सकता है।

2. मान लीजिए कि चाँद का एक मित्र है जो देख नहीं सकता। चाँद उसे अपने बदलते हुए आकार के बारे में कैसे समझाएगा?
उत्तर: चाँद अपने मित्र को स्पर्श और उदाहरणों के माध्यम से अपने बदलते हुए आकार के बारे में समझाएगा। अलग-अलग वस्तुओं के स्पर्श से वह अपने अलग-अलग आकार को समझा सकता है।

 पढ़िए और समझिए

1. चाँद के लिए कुरता सिलना एक कठिन कार्य है। इसलिए चाँद की माँ ने उसका कुरता सिलवाने के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। इसे पढ़िए और इसका प्रचार-प्रसार कर चाँद की माँ की सहायता कीजिए-

 

2. अब एक रोचक विज्ञापन तैयार कीजिए, जिसमें आप अपने लिए कोई वस्तु मँगवा रहे हों।
उत्तर:


आपकी कलाकारी


आइए, चाँद के लिए एक कुरता बनाएँ।
सामग्री: रंगीन कागज, गोंद, कैंची, ग्लिटरकपड़े के छोटे टुकड़े
बनाने की विधि

चाँद का एक बड़ा चित्र बनाइए ।
अब अलग-अलग रंगीन कागज या कपड़े के टुकड़ों से चाँद के लिए सुंदर कुरता तैयार कीजिए ।
ग्लिटर या सितारों की आकृति बनाकर उसे सजाइए।
अब तैयार कुरते को कक्षा में प्रदर्शित कीजिए।

पुस्तकालय एवं अन्य स्रोत

1. पुस्तकालय में चाँद, सूरज, तारे, आकाश आदि पर बहुत-सी रोचक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें अवश्य उपलब्ध होंगी। उन पुस्तकों को ढूँढ़कर पढ़िए और उनके बारे में कक्षा में भी चर्चा कीजिए ।
उत्तर: स्वंय कीजिए

2. अपने शिक्षक, पुस्तकालय प्रभारी और मित्रों की सहायता से चाँद तथा सूरज की बदलती स्थितियों की और भी जानकारी प्राप्त कीजिए। यह भी पता लगाइए कि चंद्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण कब-कब और क्यों होते हैं। आप अपने माता-पिता या अभिभावक से भी इनके बारे में बात कर सकते हैं।
उत्तर: चाँद और सूरज की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है। पृथ्वी सूरज के इर्द-गिर्द घूमती है, इसलिए हमें सूरज उगता और डूबता हुआ दिखाई देता है। चाँद पृथ्वी के चारों ओर घूमता है, इसलिए उसका आकार (अमावस्या, पूर्णिमा आदि) बदलता रहता है।
चंद्र ग्रहण: चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूरज और चाँद के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। यह केवल पूर्णिमा के दिन होता है।
सूर्य ग्रहण: सूर्य ग्रहण तब होता है जब चाँद, पृथ्वी और सूरज के बीच आ जाता है और सूरज की रोशनी को ढक लेता है। यह केवल अमावस्या के दिन होता है।

बूझो तो जानें


उत्तर:

तरबूज, हाथ का पंजा

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