Wednesday, August 26, 2026

कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 5 // सुंदरिया

 

कक्षा – 5  // हिन्दी // पाठ - 5 //  सुंदरिया

पाठ का सारांश

सुंदरिया” कहानी हीरासिंह और उसकी प्यारी गाय सुंदरिया के प्रेम, लगाव और ईमानदारी की कहानी है। हीरासिंह एक गरीब किसान था। उसके लिए अपने परिवार और सुंदरिया का पालन-पोषण करना कठिन हो रहा था। चारे की कमी के कारण उसने सुंदरिया को बेचने का विचार किया।

हीरासिंह दिल्ली में एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी करने लगा। सेठ ने एक अच्छी गाय खरीदने को कहा। मजबूरी में हीरासिंह सुंदरिया को सेठ के पास ले आया। सुंदरिया बहुत सुंदर और स्वस्थ थी तथा खूब दूध देती थी। सेठ ने उसे खरीद लिया।

सुंदरिया अपने मालिक हीरासिंह से बहुत जुड़ी हुई थी। वह नए मालिक के साथ जाने को तैयार नहीं थी। हीरासिंह ने उसे समझाकर सेठ के साथ भेज दिया। लेकिन सेठ के यहाँ सुंदरिया ने ठीक से दूध देना बंद कर दिया। बाद में पता चला कि वह हीरासिंह के प्रेम और अपनापन को बहुत याद करती थी।

एक रात सुंदरिया चुपके से हीरासिंह के पास आ गई। उसकी आँखों में जैसे पश्चात्ताप और दुख दिखाई दे रहा था। यह देखकर हीरासिंह भावुक हो गया और उसने निश्चय किया कि वह सुंदरिया को वापस गाँव ले जाएगा। उसने सेठ से कहा कि वह मेहनत करके उसके पैसे चुका देगा और सुंदरिया को लेकर गाँव चला गया।

कहानी का मुख्य संदेश:
यह कहानी हमें सिखाती है कि पशु भी प्रेम, स्नेह और भावनाओं को समझते हैं। हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया, प्रेम और संवेदनशीलता रखनी चाहिए। साथ ही, हीरासिंह का चरित्र हमें प्रेम, ईमानदारी और जिम्मेदारी का महत्व बताता है।

शब्द

अर्थ

वाक्य

ईर्ष्या

जलन

सुंदरिया को देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।

बंदोबस्त

प्रबंध

सेठ ने गाय के लिए अच्छे चारे का बंदोबस्त किया।

सिपुर्द

सौंपना

सेठ ने गाय को घोसी के सिपुर्द कर दिया।

रुसवाई

अपमान

हीरासिंह ने कहा, “सुंदरिया, मेरी रुसवाई क्यों कराती है?”

विह्वल

बहुत भावुक

सुंदरिया को देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा।

चाकरी

नौकरी

हीरासिंह सेठ के यहाँ चाकरी करता था।

कामधेनु

बहुत अधिक दूध देने वाली गाय

सुंदरिया दूध देने में कामधेनु जैसी थी।

सानी-पानी

पशु को दिया जाने वाला चारा और पानी

हीरासिंह ने सुंदरिया को सानी-पानी दिया।

एकटक

लगातार एक ही जगह देखना

हीरासिंह सुंदरिया को एकटक देखता रहा।

लाज से गड़ जाना

बहुत शर्मिंदा होना

अपनी बात सुनकर हीरासिंह लाज से गड़ गया।

परवरिश

पालन-पोषण

माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी परवरिश करते हैं।

डील-डौल

शरीर की बनावट

सुंदरिया का डील-डौल बहुत अच्छा था।

मौसी

माँ की बहन

जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहता था।

प्यारी

प्रिय

सुंदरिया हीरासिंह की प्यारी गाय थी।

मजबूरी

विवशता

गरीबी के कारण हीरासिंह को मजबूरी में गाय बेचनी पड़ी।

चारा

पशुओं का भोजन

किसान ने गाय के लिए हरा चारा लाया।

चौकीदार

रखवाली करने वाला

हीरासिंह सेठ के यहाँ चौकीदार था।

ईमानदार

सच्चा और विश्वसनीय

हीरासिंह एक ईमानदार व्यक्ति था।

तनख्वाह

वेतन

हीरासिंह को हर महीने तनख्वाह मिलती थी।

घोसी

दूध बेचने वाला व्यक्ति

घोसी सुंदरिया को अपने साथ ले गया।

सहलाना

प्यार से हाथ फेरना

हीरासिंह ने सुंदरिया को प्यार से सहलाया।

पुचकारना

प्यार से दुलारना

हीरासिंह ने सुंदरिया को पुचकारा।

बिछोह

अलग होने का दुख

सुंदरिया का बिछोह हीरासिंह सहन नहीं कर पाया।

क्षमा

माफी

हमें अपनी गलती के लिए क्षमा माँगनी चाहिए।

अपराधिनी

अपराध करने वाली

सुंदरिया स्वयं को अपराधिनी समझ रही थी।

पश्चात्ताप

गलती पर दुख होना

गलती करने के बाद उसे पश्चात्ताप हुआ।

पुनरावृत्ति

फिर से होना

आज कहानी की पुनरावृत्ति की गई।

पालन-पोषण

देखभाल करना

पशुओं का अच्छा पालन-पोषण करना चाहिए।

निगाह

दृष्टि

उसकी निगाह सुंदरिया पर थी।

स्वस्थ

तंदुरुस्त

सुंदरिया एक स्वस्थ गाय थी।

घोसी

दूध बेचने वाला

घोसी गाय को लेकर चला गया।

सानी

पशु का चारा

किसान ने गाय के लिए सानी तैयार की।

थपथपाना

प्यार से हाथ फेरना

हीरासिंह ने सुंदरिया को थपथपाया।

इनकार

मना करना

सुंदरिया ने दूध देने से इनकार कर दिया।

सरासर

बिल्कुल / पूरी तरह

सेठ ने इसे सरासर धोखा समझा।

रकम

धन

उसने सेठ की रकम वापस कर दी।

 

बातचीत के लिए

1. जवाहरसिंह अपनी गाय को मौसी कहकर बुलाता है। आप अपने घर या आस-पास के पशु-पक्षियों को क्या कहकर पुकारते हैं ?

उत्तर: मेरे घर पर एक कुत्ता है। उसको हम लोग ब्राउनी कहकर बुलाते हैं। वहीं गायें तथा साँड़ भी आते हैं, उन्हें हम लोग उनके रंग तथा डील-डौल के आधार पर विभिन्न नामों से पुकारते हैं; जैसे- बछड़ा तथा बछिया के जोड़े को हीरा – मोती तथा बड़े दुलारे साँड़ को भोलू । पड़ोस की पालतू बिल्ली को म्याऊँ तथा पालतू तोते को मिट्ठू आदि ।

(विद्यार्थी अपनी अनुभव के आधार पर स्वयं उत्तर लिख सकते हैं।)

2. सुंदरिया के दूर चले जाने के बाद जवाहरसिंह को कैसा लगा होगा? जब आपका कोई प्रिय आपसे दूर हो जाए तो आपको कैसा लगता है?

उत्तर: सुंदरिया के दूर जाने के बाद जवाहरसिंह उदास रहने लगा होगा । उसे बार – बार उसकी याद आती होगी। इससे उसके कार्यों में बाधा उत्पन्न होती होगी । उसे अपने पिता पर गुस्सा भी आता होगा। साथ ही उसे पर्याप्त दूध – दही से भी वंचित रहना पड़ रहा होगा।

जब मेरा कोई मित्र मुझसे दूर हो जाता है, तब मुझे उसकी बड़ी याद आती है। मेरा मन किसी काम में नहीं लगता है, दिल बड़ा बेचैन – सा रहता है। उसके बारे में जानने तथा उससे बात करने का मन करता है। जब उसके बारे में जानकारी मिलती है या उससे बात करने का मौका मिलता है तो दिल को अच्छा लगता है।

(विद्यार्थी अपने मन के विचार भी लिख सकते हैं ।)

3. जवाहरसिंह सुंदरिया की देखभाल के लिए क्या-क्या करता होगा ?

उत्तर: जवाहरसिंह सुंदरिया की देखभाल में अपने घरवालों की मदद करता होगा। वह उसके खाने-पीने का ध्यान रखता होगा। उसे समय-समय पर सहलाता होगा, उससे बातें करता होगा । दूध दुहते समय उसके शरीर के मक्खी-मच्छरों को हवा करके भगाता होगा। उसे नहलाते समय अपने पिता जी को पानी देता होगा।

 4. आप अपने आस-पास के पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या करते हैं?

उत्तर: मैं अपनी छत पर पक्षियों तथा बंदरों के पीने के लिए बरतन में पानी रखता हूँ। घर में खाने के बाद बचे खाद्य-पदार्थ–रोटी, चावल, सब्ज़ी, कच्ची सब्ज़ी के बचे हिस्से आदि घर के बाहर एक बरतन में रखता हूँ, जिसे गली में आने वाली गायें, साँड़ तथा कुत्ते खाते हैं। मैं अपने घर के आस-पास पाले गए पशु-पक्षियों को प्यार करता हूँ, उनकी देखरेख में उनके मालिकों की मदद करता हूँ। अगर कोई इन पालतू पशु-पक्षियों को मारता या परेशान करता है तो मैं उसे ऐसा करने से रोकता हूँ।

पाठ से

नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर पर   का चिह्न बनाइए । प्रश्नों के एक अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं-––
प्रश्न 1. लोग सुंदरिया को देखकर ईर्ष्या क्यों करते थे?
(क) सुंदरिया को खाने-पीने को बहुत कुछ मिलता था।
(
ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी।
(
ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी।
(
घ) सुंदरिया सभी से प्रेम करती थी।
उत्तर:
(ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। 
(
ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी। 

प्रश्न 2. हीरासिंह के मन में सुंदरिया को बेचने की बात क्यों आई?
(क) सुंदरिया सभी को परेशान करने लगी थी।
(
ख) सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था।
(
ग) सुंदरिया हीरासिंह के घर नहीं रहना चाहती थी।
(
घ) सुंदरिया पड़ोसियों को परेशान करती थी।
उत्तर:
(ख) सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था। 

 प्रश्न 3. हीरासिंह ने स्वयं को गाय की नौकरी पर लगाने की बात क्यों कही ?

(क) सुंदरिया को ठीक से चारा नहीं मिलता था।
(
ख) वह गाय से बिछोह सहन नहीं कर पा रहा था।
(
ग) उसे रुपयों की आवश्यकता थी।
(
घ) गाय घोसी के व्यवहार से प्रसन्न नहीं थी।
उत्तर:
(ख) वह गाय से बिछोह सहन नहीं कर पा रहा था। 

प्रश्न 4. गाय घोसी के साथ क्यों नहीं जाना चाहती थी?
(क) गाय हीरासिंह और उसके परिवार से अलग नहीं होना चाहती थी।
(
ख) गाय को भय था कि घोसी उसे स्नेह से नहीं पालेगा।
(
ग) गाय को अपने गाँव के सभी लोगों की याद आ रही थी।
(
घ) गाय बीमार थी और चल नहीं पा रही थी ।
उत्तर:
(ख) गाय को भय था कि घोसी उसे स्नेह से नहीं पालेगा। 

सोचिए और लिखिए

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए-
(क) हीरासिंह गाय को बेचने से क्यों डर रहा था ?
उत्तर: खाने-पीने की कमी होने के कारण हीरासिंह गाय को बेच देना चाहता था, मगर उसका बेटा जवाहरसिंह उसे बहुत प्यार करता था तथा उसे मौसी कहता था इसलिए बेचने से डरता था।

(ख) सेठ हीरासिंह की गाय को देखकर क्यों प्रसन्न हुआ ?
उत्तर: सेठ ने सुंदरिया जैसी सुंदर, स्वस्थ गाय पहले कभी नहीं देखी थी, इसलिए वह उसे देखकर प्रसन्न हुआ।

(ग) “तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा?” सेठ ने हीरासिंह से ऐसा क्यों कहा?

उत्तर: सेठ के घर आने के दूसरे दिन सवेरे सुंदरिया गाय ने पाँच सेर भी दूध नहीं दिया, जबकि हीरासिंह ने पिछले ही दिन पंद्रह सेर से कुछ ऊपर दूध दुहकर निकाला था। यह देखकर सेठ ने हीरासिंह से ऐसा कहा ।

(घ) सेठ के कुछ कहने से पहले ही हीरासिंह गाय को लेकर क्यों चल दिया?

उत्तर: गाय को घर वापस ले जाने के पहले की रात को गाय की स्थिति देखकर तथा उसके दुख का अनुभव कर हीरासिंह बहुत व्याकुल हो गया तथा रो पड़ा । उसे लगा कि अब गाय को यहाँ रखना ठीक नहीं है, इसलिए उसने सेठ से साफ़-साफ़ बात की तथा सेठ के कुछ कहने से पहले ही गाय को लेकर गाँव की ओर चल पड़ा।


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