कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 7 // मेरा बचपन
पाठ का सारांश
लेखक –
प्रेमचंद‘मेरा बचपन’ पाठ में लेखक प्रेमचंद ने अपने बचपन की मधुर और आनंददायक यादों को साझा किया
है। उन्हें अपना कच्चा घर, पयाल का
बिछौना, नंगे
पाँव खेतों में घूमना और आम के पेड़ों पर चढ़ना बहुत याद आता है। वे अपने चचेरे
भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव में मौलवी साहब के यहाँ पढ़ने जाते
थे और सुबह मटर तथा जौ का चबेना खाते थे।लेखक को रामलीला देखने और उसकी तैयारियों में भाग लेने में बहुत आनंद
आता था। वे दोपहर से ही वहाँ पहुँच जाते और छोटे-मोटे काम पूरे उत्साह से करते थे।
उन्हें बचपन में गुल्ली-डंडा खेलना विशेष रूप से पसंद था। वे बताते हैं कि इस खेल
के लिए महँगे सामान की आवश्यकता नहीं होती थी। पेड़ की टहनी से गुल्ली-डंडा बनाकर
बच्चे आसानी से खेल लेते थे।
लेखक के अनुसार गुल्ली-डंडा केवल एक खेल नहीं था, बल्कि उसमें मित्रता, उत्साह, सरलता और समानता की भावना भी थी। खेलते समय अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं
रहता था और सभी बच्चे मिल-जुलकर खेलते थे। लेखक को आज भी गुल्ली-डंडा देखकर अपने
बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं।
पाठ में चना-चबेना, पहर, तमाशा, रामलीला और प्राथमिक चिकित्सा से जुड़ी गतिविधियाँ भी दी गई हैं। अंत में मुरलीकांत राजाराम पेटकर के जीवन और उनकी उपलब्धियों के माध्यम से लगन और
परिश्रम का महत्व बताया गया है।
🌱 मुख्य
संदेश
यह पाठ हमें सिखाता है कि बचपन की सरल खुशियाँ, मित्रता, खेल, उत्साह
और मिल-जुलकर रहने की भावना जीवन की अनमोल यादें बन जाती हैं।
शब्द
अर्थ
वाक्य
बिछौना
सोने के लिए बिछाई जाने वाली वस्तु
दादी ने मेरे लिए नया बिछौना बिछाया।
चबेना
चबाकर खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ
मुझे शाम को चबेना खाना पसंद है।
उत्साह
उमंग, जोश
बच्चों ने खेल में बहुत उत्साह दिखाया।
सजावट
सुंदर बनाने की प्रक्रिया
जन्मदिन पर घर की सजावट की गई।
विलायती
विदेशी
उसने विलायती खिलौना खरीदा।
अरुचि
पसंद न होना
मुझे कड़वी दवा से अरुचि है।
अभिमान
घमंड
हमें अपनी सफलता पर अभिमान नहीं करना चाहिए।
लगन
किसी काम को करने की इच्छा और मेहनत
रिया ने लगन से पढ़ाई की।
जमघट
बहुत से लोगों का एक जगह इकट्ठा होना
मैदान में बच्चों का जमघट लगा था।
मिठास
मीठापन
आम में बहुत मिठास है।
तमाशा
मनोरंजन का दृश्य या खेल
मेले में हमने एक मजेदार तमाशा देखा।
प्राथमिक
सबसे पहले या आरंभिक
घायल बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया गया।
प्रवीणता
किसी काम में अच्छी योग्यता
सीमा ने चित्र बनाने में प्रवीणता प्राप्त की।
प्रसिद्ध
मशहूर
लता बाजार अपनी मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है।
परिश्रम
मेहनत
परिश्रम से सफलता मिलती है।
अनुभव
किसी काम से प्राप्त ज्ञान
यात्रा का मेरा अच्छा अनुभव रहा।
भ्रमण
घूमना
हम रविवार को संग्रहालय के भ्रमण पर गए।
डॉक्टर
चिकित्सक ने रोगी की जाँच की।
कच्चा
पक्का
न बना हुआ
गाँव
में एक कच्चा घर था।
जेठे
उम्र
में बड़े
मेरा
भाई मुझसे दो साल जेठा है।
पात्र
नाटक
में भूमिका निभाने वाला व्यक्ति
रामलीला
के पात्र सुंदर वेश में थे।
टहनी
पेड़
की छोटी शाखा
चिड़िया
टहनी पर बैठी है।
गुंजाइश
संभावना
या जगह
इस
कमरे में खेलने की गुंजाइश है।
बातचीत के लिए
1. लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक
उत्साहित करते होंगे?
उत्तर: लेखक रामलीला की
तैयारियों में किसी पात्र का अभिनय करना, वेशभूषा पहनाना, मंच सजाना, गीत-भजन गाना, वाद्य यंत्र
बजाना आदि कार्य सबसे अधिक उत्साहित होकर करते होंगे।
2. आपको लेखक
के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं?
उत्तर: लेखक का पुराने व
भारतीय खेलों के प्रति लगाव की बात, हमें सबसे अच्छी लगी ।
विद्यार्थी अन्य बातें भी लिख सकते हैं।
3. खेलते समय
चोट न लगे, इसके लिए
आप क्या – क्या कर सकते हैं?
उत्तर: खेलते समय चोट न
लगे, इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं; जैसे- नियमों का
पालन करें, एक-दूसरे को धक्का न दें, खतरनाक जगहों पर न खेलें
आदि ।
4. लेखक के
पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे?
उत्तर: लेखक के पिता और
घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे रोज़मर्रा की बातें; जैसे – खाना क्या
बनेगा, घर के खर्च, लेखक की पढ़ाई की चर्चा, गाँव- खेती आदि
के बारे में बातें करते होंगे।
पाठ से
सोचिए और लिखिए
1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में
लिखिए-(क) लेखक के चचेरे
भाई हलधर की आयु कितनी थी?उत्तर: लेखक के चचेरे भाई हलधर की आयु 10 वर्ष थी।
(ख) लेखक ने अपनी
घरवालों के क्रोध का कारण क्या बताया है?उत्तर: लेखक ने अपने घरवालों के क्रोध का कारण उसका गुल्ली-डंडा
खेलना बताया है। (ग) लेखक के अनुसार, गुल्ली-डंडा और विलायती
खेलों में क्या अंतर है?
उत्तर: गुल्ली-डंडा, विलायती खेलों की तुलना में कम खर्चीला होता है।
(घ) इस पाठ में लेखक
ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है?
उत्तर: इस पाठ में लेखक ने अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव
में पढ़ने जाना, रामलीला की
तैयारियाँ करवाना, गुल्ली-डंडे से
प्रेम, घरवालों द्वारा
खेल को पसंद न किया जाने के विभिन्न अनुभवों को याद किया है।
समझ और अनुभव
प्रश्न 1.
लेखक के बचपन के कौन-कौन से काम आपने भी किए
हैं?उत्तर: विद्यार्थी अपना अनुभव साझा कर सकते हैं।प्रश्न 2.
लेखक अपने बचपन में खेलने के लिए स्वयं
गुल्ली बना लेते थे। आप कौन-कौन से खेल-खिलौने स्वयं बना लेते हैं? किसी
एक को बनाकर कक्षा में लेकर आइए और अपने समूह के साथ मिलकर खेलिए ।उत्तर: कागज़ के हवाई जहाज़ – नाव, पतंग, कठपुतली, गेंद, बोर्ड गेम, रामलीला का स्टेज आदिप्रश्न 3.
अनेक बच्चे कपड़े धोने के लिए काम में आने
वाली ‘ थापी’ को बल्ले की तरह उपयोग कर लेते हैं। आप अपने घर या पास-पड़ोस की किन
वस्तुओं को खेल-खिलौने की तरह उपयोग में लेते हैं ?उत्तर: घर तथा पास-पड़ोस
की वस्तुएँ जो खिलौनों की तरह उपयोग की जा सकती हैं-दादा जी की छड़ी – हॉकी
गत्ते का डिब्बा – घर, कार
बोतल के ढक्कन – पहिये
प्लास्टिक की बोतलें – बॉलिंग पिन
चम्मच – ड्रमस्टिक आदि
प्रश्न 4.
लेखक बचपन में अनेक काम उत्साह से
दौड़-दौड़कर किया करते थे। आप कौन-से काम बहुत उत्साह से करते हैं?उत्तर: विद्यार्थी
अपना अनुभव साझा कर सकते हैं।मिलान कीजिए
नीचे दिए गए
चित्रों का उनके उपयुक्त विवरण से मिलान कीजिए-उत्तर:खान-पानप्रश्न 1. लेखक सवेरे-सवेरे सबसे पहले मटर और
जौ का चबेना खाते थे । ‘चबेना’ के बारे में नीचे दी गई जानकारी पढ़िए-
गुणकारी स्वादिष्ट चना-चबेना
चना-चबेना प्रायः हम उस खाद्य सामग्री को कहते हैं जो चबाकर
खाई जाती है। मकई, चिउड़ा, भेल, कई तरह के भुने
हुए दाने, भुने हुए चावल, चना, मटर और मुरमुरे, भुना हुआ हरा व
उबला चना, दर्जनों ऐसी खाद्य सामग्रियाँ हैं जो हम भारतीय चाहे देश के
किसी भी कोने में रहते हों, किसी-न-किसी रूप में चबाते हैं। कई प्रकार की
कचरियाँ, कुरकुरे, पापड़, नमकीन, ये भी चबेनों का
ही हिस्सा हैं। लेकिन ये घरेलू कम व सामान्यतः बाजार से मिलने वाले उत्पाद हैं
जिनमें स्वाद तो बहुत होता है लेकिन ये शरीर के लिए उतने स्वास्थ्यवर्धक नहीं होते
जितने घर के बने चबेने होते हैं।
ऐसे बनाया जाता है चना चबेनादेश के विभिन्न स्थानों में
चना-चबेना विशेष ढंग से बनाया जाता है। चना-चबेना में मटर, चना, सूखा चना, मिर्च- अदरक, प्याज-लहसुन, मक्का, पोहा, लाई, मूँगफली आदि
खाद्य सामग्रियाँ सम्मिलित होती हैं। सबसे पहले इन सभी को कड़ाही में नमक डालकर
भली प्रकार भून लिया जाता है। भुनने के बाद उसमें हल्का तेल मिलाया जाता है। मिर्च
की चटनी के साथ प्याज और लहसुन भी मिलाया जाता है। इनसे चना-चबेना का स्वाद बढ़
जाता है।
प्रश्न 2.आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए-
विद्यार्थी अपना अनुभव साझा कर सकते हैं।
आइए
जानें
“मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” ‘दोपहर’ शब्द बना है
‘पहर’ से। ‘पहर’ का अर्थ होता है- दिन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय ।
प्रश्न 1.एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर
कितने पहर होते हैं ?
उत्तर: आठ पहर (1 दिन = 4 पहर 1 रात = 4 पहर)
प्रश्न 2. नीचे दिन के चार पहर दर्शाए गए हैं। आप इन पहरों
में क्या-क्या करते हैं, लिखिए या चित्र बनाइए-
भाषा की बात• “विलायती खेलों में सबसे बड़ा ऐब है कि उनके सामान महँगे
होते हैं।”
इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची गई है। इन पर
ध्यान दीजिए। यहाँ ‘विलायती’, ‘बड़ा’ और ‘महँगे’ शब्द क्रमशः ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’
की विशेषता बता रहे हैं। आप जानते ही हैं कि ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ संज्ञा
शब्द हैं।
अब पाठ में से कुछ अन्य विशेषण तथा संज्ञा
शब्द चुनकर नीचे लिखिए-
विशेषण संज्ञा
विलायती खेल
टूटा घर
सारी बातें
चचेरा भाई
आठ साल
छोटे-मोटे काम
आपके खेल
प्रश्न 1. ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते होंगे जिनमें किसी
विशेष महँगे सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि जिनकी आवश्यकता पड़ती है, उन्हें आप स्वयं
ही बना लेते हैं। ऐसे ही कुछ खेलों के चित्र नीचे दिए गए हैं। रेखा खींचकर इनके
सही नामों से मिलाइए-
आपस में चर्चा कीजिए कि इन खेलों को कैसे खेल
जाता है तथा यह भी बताइए कि आपके क्षेत्र में इन्हें क्या कहा जाता है।उत्तर: कबड्डी – हू-तू-तू / चेडुगुडु, इकड़ी- दुकड़ी-हॉपस्कॉच, लट्टू- बंबारम, पतंग – गुड़ा / गुड़िया
आदि नामों से बुलाया जाता है।
प्रश्न 2. उन आनंदमयी खेलों की एक सूची बनाइए
जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं। आप इस कार्य में मित्रों, शिक्षकों
एवं अपने अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: लूड़ो, साँप – सीढ़ी, पज़ल, गेंद पकड़ना, टेबल टेनिस, आदि खेल खेले जा सकते हैं।
इन्हें भी जानिएसन् 1944 में महाराष्ट्र में जन्मे मुरलीकांत राजाराम
पेटकर भारत के एक प्रसिद्ध पैरालंपिक तैराक के रूप में जाने जाते हैं।
पैरालंपिक खेल दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समय-समय पर
आयोजित होने वाला ओलंपिक खेलों का कार्यक्रम है। पेटकर भारतीय सेना के एक जवान थे।
सन् 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय कई गोलियाँ लगने कारण वे लकवाग्रस्त
हो गए।
उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर तैराकी शुरू कर दी। कुश्ती, हॉकी आदि खेलों में बचपन
से ही रुचि रखने वाले मुरलीकांत पेटकर ने अपनी लगन और परिश्रम ही समय में तैराकी
में प्रवीणता प्राप्त कर ली।
वे 1972 के हाइडिलबर्ग पैरालंपिक में भारत को पहला स्वर्ण
पदक दिलाने वाले दिव्यांग तैराक बने । तत्पश्चात सन् 2018 में भारत सरकार ने
उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
पता लगाइए
• अब आप चित्र में दिखाई गई प्रसिद्ध पैरालंपिक महिला
खिलाड़ी के बारे में पता लगाइए। इसके लिए आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा अन्य
स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: चित्र में दिखाई गई इस प्रसिद्ध पैरालंपिक
खिलाड़ी का नाम शीतल देवी है। ये भारत की एक पैरा आर्चर (तीरंदाज़) हैं।जन्म – 10 जनवरी, 2007
जन्मस्थान – जम्मू-कश्मीर, भारत
खेल – तीरंदाजी
उपलब्धियाँ – पैरालंपिक खेल (पेरिस) – कांस्य पदक (2024, मिश्रित टीम)
विश्व चैंपियनशिप (प्लज़ेन) – रजत पदक (2023)
एशियाई चैंपियनशिप (बैंकॉक) – स्वर्ण पदक (2023, मिश्रित), रजत पदक (2023, व्यक्ति)
एशियाई पैरा खेल ( हांग्जो) – स्वर्ण पदक (2022, व्यक्ति / मिश्रित), रजत पदक (2022, डबल्स)
पुरस्कार – अर्जुन पुरस्कार 2023, एशियाई पैरालंपिक समिति
द्वारा वर्ष 2023 का सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट, विश्व तीरंदाजी द्वारा वर्ष 2023 की सर्वश्रेष्ठ महिला पैरा
तीरंदाज़।
लेखक को रामलीला देखने और उसकी तैयारियों में भाग लेने में बहुत आनंद
आता था। वे दोपहर से ही वहाँ पहुँच जाते और छोटे-मोटे काम पूरे उत्साह से करते थे।
उन्हें बचपन में गुल्ली-डंडा खेलना विशेष रूप से पसंद था। वे बताते हैं कि इस खेल
के लिए महँगे सामान की आवश्यकता नहीं होती थी। पेड़ की टहनी से गुल्ली-डंडा बनाकर
बच्चे आसानी से खेल लेते थे।
लेखक के अनुसार गुल्ली-डंडा केवल एक खेल नहीं था, बल्कि उसमें मित्रता, उत्साह, सरलता और समानता की भावना भी थी। खेलते समय अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं
रहता था और सभी बच्चे मिल-जुलकर खेलते थे। लेखक को आज भी गुल्ली-डंडा देखकर अपने
बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं।
पाठ में चना-चबेना, पहर, तमाशा, रामलीला और प्राथमिक चिकित्सा से जुड़ी गतिविधियाँ भी दी गई हैं। अंत में मुरलीकांत राजाराम पेटकर के जीवन और उनकी उपलब्धियों के माध्यम से लगन और
परिश्रम का महत्व बताया गया है।
🌱 मुख्य
संदेश
यह पाठ हमें सिखाता है कि बचपन की सरल खुशियाँ, मित्रता, खेल, उत्साह और मिल-जुलकर रहने की भावना जीवन की अनमोल यादें बन जाती हैं।
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शब्द |
अर्थ |
वाक्य |
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बिछौना |
सोने के लिए बिछाई जाने वाली वस्तु |
दादी ने मेरे लिए नया बिछौना बिछाया। |
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चबेना |
चबाकर खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ |
मुझे शाम को चबेना खाना पसंद है। |
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उत्साह |
उमंग, जोश |
बच्चों ने खेल में बहुत उत्साह दिखाया। |
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सजावट |
सुंदर बनाने की प्रक्रिया |
जन्मदिन पर घर की सजावट की गई। |
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विलायती |
विदेशी |
उसने विलायती खिलौना खरीदा। |
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अरुचि |
पसंद न होना |
मुझे कड़वी दवा से अरुचि है। |
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अभिमान |
घमंड |
हमें अपनी सफलता पर अभिमान नहीं करना चाहिए। |
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लगन |
किसी काम को करने की इच्छा और मेहनत |
रिया ने लगन से पढ़ाई की। |
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जमघट |
बहुत से लोगों का एक जगह इकट्ठा होना |
मैदान में बच्चों का जमघट लगा था। |
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मिठास |
मीठापन |
आम में बहुत मिठास है। |
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तमाशा |
मनोरंजन का दृश्य या खेल |
मेले में हमने एक मजेदार तमाशा देखा। |
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प्राथमिक |
सबसे पहले या आरंभिक |
घायल बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया गया। |
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प्रवीणता |
किसी काम में अच्छी योग्यता |
सीमा ने चित्र बनाने में प्रवीणता प्राप्त की। |
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प्रसिद्ध |
मशहूर |
लता बाजार अपनी मिठाइयों के लिए प्रसिद्ध है। |
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परिश्रम |
मेहनत |
परिश्रम से सफलता मिलती है। |
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अनुभव |
किसी काम से प्राप्त ज्ञान |
यात्रा का मेरा अच्छा अनुभव रहा। |
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भ्रमण |
घूमना |
हम रविवार को संग्रहालय के भ्रमण पर गए। |
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डॉक्टर |
चिकित्सक ने रोगी की जाँच की। |
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कच्चा |
पक्का
न बना हुआ |
गाँव
में एक कच्चा घर था। |
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जेठे |
उम्र
में बड़े |
मेरा
भाई मुझसे दो साल जेठा है। |
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पात्र |
नाटक
में भूमिका निभाने वाला व्यक्ति |
रामलीला
के पात्र सुंदर वेश में थे। |
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टहनी |
पेड़
की छोटी शाखा |
चिड़िया
टहनी पर बैठी है। |
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गुंजाइश |
संभावना
या जगह |
इस
कमरे में खेलने की गुंजाइश है। |
बातचीत के लिए
1. लेखक को रामलीला की तैयारियों में कौन-कौन से काम सबसे अधिक
उत्साहित करते होंगे?
उत्तर: लेखक रामलीला की
तैयारियों में किसी पात्र का अभिनय करना, वेशभूषा पहनाना, मंच सजाना, गीत-भजन गाना, वाद्य यंत्र
बजाना आदि कार्य सबसे अधिक उत्साहित होकर करते होंगे।
2. आपको लेखक
के बचपन की कौन-कौन सी बातें सबसे अच्छी लगीं? वे बातें आपको अच्छी क्यों लगीं?
उत्तर: लेखक का पुराने व भारतीय खेलों के प्रति लगाव की बात, हमें सबसे अच्छी लगी । विद्यार्थी अन्य बातें भी लिख सकते हैं।
3. खेलते समय
चोट न लगे, इसके लिए
आप क्या – क्या कर सकते हैं?
उत्तर: खेलते समय चोट न
लगे, इसके लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं; जैसे- नियमों का
पालन करें, एक-दूसरे को धक्का न दें, खतरनाक जगहों पर न खेलें
आदि ।
4. लेखक के
पिता और घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे क्या-क्या बातें करते होंगे?
उत्तर: लेखक के पिता और
घर के अन्य सदस्य चौके में बैठे-बैठे रोज़मर्रा की बातें; जैसे – खाना क्या
बनेगा, घर के खर्च, लेखक की पढ़ाई की चर्चा, गाँव- खेती आदि
के बारे में बातें करते होंगे।
पाठ से
सोचिए और लिखिए
उत्तर: गुल्ली-डंडा, विलायती खेलों की तुलना में कम खर्चीला होता है।
(घ) इस पाठ में लेखक
ने अपने बचपन के किन-किन अनुभवों को याद किया है?
उत्तर: इस पाठ में लेखक ने अपने चचेरे भाई हलधर के साथ दूसरे गाँव
में पढ़ने जाना, रामलीला की
तैयारियाँ करवाना, गुल्ली-डंडे से
प्रेम, घरवालों द्वारा
खेल को पसंद न किया जाने के विभिन्न अनुभवों को याद किया है।
समझ और अनुभव
दादा जी की छड़ी – हॉकी
गत्ते का डिब्बा – घर, कार
बोतल के ढक्कन – पहिये
प्लास्टिक की बोतलें – बॉलिंग पिन
चम्मच – ड्रमस्टिक आदि
मिलान कीजिए
प्रश्न 1. लेखक सवेरे-सवेरे सबसे पहले मटर और
जौ का चबेना खाते थे । ‘चबेना’ के बारे में नीचे दी गई जानकारी पढ़िए-
गुणकारी स्वादिष्ट चना-चबेना
चना-चबेना प्रायः हम उस खाद्य सामग्री को कहते हैं जो चबाकर
खाई जाती है। मकई, चिउड़ा, भेल, कई तरह के भुने
हुए दाने, भुने हुए चावल, चना, मटर और मुरमुरे, भुना हुआ हरा व
उबला चना, दर्जनों ऐसी खाद्य सामग्रियाँ हैं जो हम भारतीय चाहे देश के
किसी भी कोने में रहते हों, किसी-न-किसी रूप में चबाते हैं। कई प्रकार की
कचरियाँ, कुरकुरे, पापड़, नमकीन, ये भी चबेनों का
ही हिस्सा हैं। लेकिन ये घरेलू कम व सामान्यतः बाजार से मिलने वाले उत्पाद हैं
जिनमें स्वाद तो बहुत होता है लेकिन ये शरीर के लिए उतने स्वास्थ्यवर्धक नहीं होते
जितने घर के बने चबेने होते हैं।
ऐसे बनाया जाता है चना चबेनादेश के विभिन्न स्थानों में
चना-चबेना विशेष ढंग से बनाया जाता है। चना-चबेना में मटर, चना, सूखा चना, मिर्च- अदरक, प्याज-लहसुन, मक्का, पोहा, लाई, मूँगफली आदि
खाद्य सामग्रियाँ सम्मिलित होती हैं। सबसे पहले इन सभी को कड़ाही में नमक डालकर
भली प्रकार भून लिया जाता है। भुनने के बाद उसमें हल्का तेल मिलाया जाता है। मिर्च
की चटनी के साथ प्याज और लहसुन भी मिलाया जाता है। इनसे चना-चबेना का स्वाद बढ़
जाता है।
प्रश्न 2.आप दिन भर क्या-क्या खाते-पीते हैं? एक सूची बनाइए-
विद्यार्थी अपना अनुभव साझा कर सकते हैं।
आइए
जानें
“मैं दोपहर से ही वहाँ जा बैठता।” ‘दोपहर’ शब्द बना है
‘पहर’ से। ‘पहर’ का अर्थ होता है- दिन का चौथा भाग या तीन घंटे का समय ।
प्रश्न 1.एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर
कितने पहर होते हैं ?
उत्तर: आठ पहर (1 दिन = 4 पहर 1 रात = 4 पहर)
प्रश्न 2. नीचे दिन के चार पहर दर्शाए गए हैं। आप इन पहरों
में क्या-क्या करते हैं, लिखिए या चित्र बनाइए-
भाषा की बात
• “विलायती खेलों में सबसे बड़ा ऐब है कि उनके सामान महँगे
होते हैं।”
इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खींची गई है। इन पर
ध्यान दीजिए। यहाँ ‘विलायती’, ‘बड़ा’ और ‘महँगे’ शब्द क्रमशः ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’
की विशेषता बता रहे हैं। आप जानते ही हैं कि ‘खेल’, ‘ऐब’ तथा ‘सामान’ संज्ञा
शब्द हैं।
अब पाठ में से कुछ अन्य विशेषण तथा संज्ञा
शब्द चुनकर नीचे लिखिए-
विशेषण संज्ञा
विलायती खेल
टूटा घर
सारी बातें
चचेरा भाई
आठ साल
छोटे-मोटे काम
आपके खेल
प्रश्न 1. ऐसे अनेक खेल आप सभी खेलते होंगे जिनमें किसी
विशेष महँगे सामान की आवश्यकता नहीं पड़ती बल्कि जिनकी आवश्यकता पड़ती है, उन्हें आप स्वयं
ही बना लेते हैं। ऐसे ही कुछ खेलों के चित्र नीचे दिए गए हैं। रेखा खींचकर इनके
सही नामों से मिलाइए-
आपस में चर्चा कीजिए कि इन खेलों को कैसे खेल जाता है तथा यह भी बताइए कि आपके क्षेत्र में इन्हें क्या कहा जाता है।
उत्तर: कबड्डी – हू-तू-तू / चेडुगुडु, इकड़ी- दुकड़ी-हॉपस्कॉच, लट्टू- बंबारम, पतंग – गुड़ा / गुड़िया
आदि नामों से बुलाया जाता है।
प्रश्न 2. उन आनंदमयी खेलों की एक सूची बनाइए
जो आप अपने दिव्यांग मित्रों के साथ खेल सकते हैं। आप इस कार्य में मित्रों, शिक्षकों
एवं अपने अभिभावकों की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: लूड़ो, साँप – सीढ़ी, पज़ल, गेंद पकड़ना, टेबल टेनिस, आदि खेल खेले जा सकते हैं।
सन् 1944 में महाराष्ट्र में जन्मे मुरलीकांत राजाराम
पेटकर भारत के एक प्रसिद्ध पैरालंपिक तैराक के रूप में जाने जाते हैं।
पैरालंपिक खेल दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समय-समय पर
आयोजित होने वाला ओलंपिक खेलों का कार्यक्रम है। पेटकर भारतीय सेना के एक जवान थे।
सन् 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय कई गोलियाँ लगने कारण वे लकवाग्रस्त
हो गए।
उन्होंने चिकित्सकों की सलाह पर तैराकी शुरू कर दी। कुश्ती, हॉकी आदि खेलों में बचपन
से ही रुचि रखने वाले मुरलीकांत पेटकर ने अपनी लगन और परिश्रम ही समय में तैराकी
में प्रवीणता प्राप्त कर ली।
वे 1972 के हाइडिलबर्ग पैरालंपिक में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले दिव्यांग तैराक बने । तत्पश्चात सन् 2018 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।
पता लगाइए
• अब आप चित्र में दिखाई गई प्रसिद्ध पैरालंपिक महिला
खिलाड़ी के बारे में पता लगाइए। इसके लिए आप अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा अन्य
स्रोतों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: चित्र में दिखाई गई इस प्रसिद्ध पैरालंपिक खिलाड़ी का नाम शीतल देवी है। ये भारत की एक पैरा आर्चर (तीरंदाज़) हैं।
जन्म – 10 जनवरी, 2007
जन्मस्थान – जम्मू-कश्मीर, भारत
खेल – तीरंदाजी
उपलब्धियाँ – पैरालंपिक खेल (पेरिस) – कांस्य पदक (2024, मिश्रित टीम)
विश्व चैंपियनशिप (प्लज़ेन) – रजत पदक (2023)
एशियाई चैंपियनशिप (बैंकॉक) – स्वर्ण पदक (2023, मिश्रित), रजत पदक (2023, व्यक्ति)
एशियाई पैरा खेल ( हांग्जो) – स्वर्ण पदक (2022, व्यक्ति / मिश्रित), रजत पदक (2022, डबल्स)
पुरस्कार – अर्जुन पुरस्कार 2023, एशियाई पैरालंपिक समिति
द्वारा वर्ष 2023 का सर्वश्रेष्ठ युवा एथलीट, विश्व तीरंदाजी द्वारा वर्ष 2023 की सर्वश्रेष्ठ महिला पैरा
तीरंदाज़।