कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 5 // सुंदरिया
पाठ का सारांश
“सुंदरिया” कहानी हीरासिंह और उसकी प्यारी गाय सुंदरिया के प्रेम, लगाव और ईमानदारी की कहानी है। हीरासिंह एक गरीब
किसान था। उसके लिए अपने परिवार और सुंदरिया का पालन-पोषण करना कठिन हो रहा था।
चारे की कमी के कारण उसने सुंदरिया को बेचने का विचार किया।
हीरासिंह दिल्ली में एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी
करने लगा। सेठ ने एक अच्छी गाय खरीदने को कहा। मजबूरी में हीरासिंह सुंदरिया को
सेठ के पास ले आया। सुंदरिया बहुत सुंदर और स्वस्थ थी तथा खूब दूध देती थी। सेठ ने
उसे खरीद लिया।
सुंदरिया अपने मालिक हीरासिंह से बहुत जुड़ी हुई थी।
वह नए मालिक के साथ जाने को तैयार नहीं थी। हीरासिंह ने उसे समझाकर सेठ के साथ भेज
दिया। लेकिन सेठ के यहाँ सुंदरिया ने ठीक से दूध देना बंद कर दिया। बाद में पता
चला कि वह हीरासिंह के प्रेम और अपनापन को बहुत याद करती थी।
एक रात सुंदरिया चुपके से हीरासिंह के पास आ गई। उसकी
आँखों में जैसे पश्चात्ताप और दुख दिखाई दे रहा था। यह देखकर हीरासिंह भावुक हो
गया और उसने निश्चय किया कि वह सुंदरिया को वापस गाँव ले जाएगा। उसने सेठ से कहा
कि वह मेहनत करके उसके पैसे चुका देगा और सुंदरिया को लेकर गाँव चला गया।
कहानी का मुख्य संदेश:यह कहानी हमें सिखाती है
कि पशु भी
प्रेम, स्नेह
और भावनाओं को समझते हैं। हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया, प्रेम और संवेदनशीलता रखनी चाहिए। साथ ही, हीरासिंह का चरित्र हमें प्रेम, ईमानदारी और जिम्मेदारी का महत्व बताता है।
शब्द
अर्थ
वाक्य
ईर्ष्या
जलन
सुंदरिया को देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी।
बंदोबस्त
प्रबंध
सेठ ने गाय के लिए अच्छे चारे का बंदोबस्त किया।
सिपुर्द
सौंपना
सेठ ने गाय को घोसी के सिपुर्द कर दिया।
रुसवाई
अपमान
हीरासिंह ने कहा, “सुंदरिया, मेरी रुसवाई क्यों कराती है?”
विह्वल
बहुत भावुक
सुंदरिया को देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा।
चाकरी
नौकरी
हीरासिंह सेठ के यहाँ चाकरी करता था।
कामधेनु
बहुत अधिक दूध देने वाली गाय
सुंदरिया दूध देने में कामधेनु जैसी थी।
सानी-पानी
पशु को दिया जाने वाला चारा और पानी
हीरासिंह ने सुंदरिया को सानी-पानी दिया।
एकटक
लगातार एक ही जगह देखना
हीरासिंह सुंदरिया को एकटक देखता रहा।
लाज से गड़ जाना
बहुत शर्मिंदा होना
अपनी बात सुनकर हीरासिंह लाज से गड़ गया।
परवरिश
पालन-पोषण
माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी परवरिश करते हैं।
डील-डौल
शरीर की बनावट
सुंदरिया का डील-डौल बहुत अच्छा था।
मौसी
माँ की बहन
जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहता था।
प्यारी
प्रिय
सुंदरिया हीरासिंह की प्यारी गाय थी।
मजबूरी
विवशता
गरीबी के कारण हीरासिंह को मजबूरी में गाय बेचनी पड़ी।
चारा
पशुओं का भोजन
किसान ने गाय के लिए हरा चारा लाया।
चौकीदार
रखवाली करने वाला
हीरासिंह सेठ के यहाँ चौकीदार था।
ईमानदार
सच्चा और विश्वसनीय
हीरासिंह एक ईमानदार व्यक्ति था।
तनख्वाह
वेतन
हीरासिंह को हर महीने तनख्वाह मिलती थी।
घोसी
दूध बेचने वाला व्यक्ति
घोसी सुंदरिया को अपने साथ ले गया।
सहलाना
प्यार से हाथ फेरना
हीरासिंह ने सुंदरिया को प्यार से सहलाया।
पुचकारना
प्यार से दुलारना
हीरासिंह ने सुंदरिया को पुचकारा।
बिछोह
अलग होने का दुख
सुंदरिया का बिछोह हीरासिंह सहन नहीं कर पाया।
क्षमा
माफी
हमें अपनी गलती के लिए क्षमा माँगनी चाहिए।
अपराधिनी
अपराध करने वाली
सुंदरिया स्वयं को अपराधिनी समझ रही थी।
पश्चात्ताप
गलती पर दुख होना
गलती करने के बाद उसे पश्चात्ताप हुआ।
पुनरावृत्ति
फिर से होना
आज कहानी की पुनरावृत्ति की गई।
पालन-पोषण
देखभाल करना
पशुओं का अच्छा पालन-पोषण करना चाहिए।
निगाह
दृष्टि
उसकी निगाह सुंदरिया पर थी।
स्वस्थ
तंदुरुस्त
सुंदरिया एक स्वस्थ गाय थी।
घोसी
दूध बेचने वाला
घोसी गाय को लेकर चला गया।
सानी
पशु का चारा
किसान ने गाय के लिए सानी तैयार की।
थपथपाना
प्यार से हाथ फेरना
हीरासिंह ने सुंदरिया को थपथपाया।
इनकार
मना करना
सुंदरिया ने दूध देने से इनकार कर दिया।
सरासर
बिल्कुल / पूरी तरह
सेठ ने इसे सरासर धोखा समझा।
रकम
धन
उसने सेठ की रकम वापस कर दी।
“सुंदरिया” कहानी हीरासिंह और उसकी प्यारी गाय सुंदरिया के प्रेम, लगाव और ईमानदारी की कहानी है। हीरासिंह एक गरीब
किसान था। उसके लिए अपने परिवार और सुंदरिया का पालन-पोषण करना कठिन हो रहा था।
चारे की कमी के कारण उसने सुंदरिया को बेचने का विचार किया।
हीरासिंह दिल्ली में एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी
करने लगा। सेठ ने एक अच्छी गाय खरीदने को कहा। मजबूरी में हीरासिंह सुंदरिया को
सेठ के पास ले आया। सुंदरिया बहुत सुंदर और स्वस्थ थी तथा खूब दूध देती थी। सेठ ने
उसे खरीद लिया।
सुंदरिया अपने मालिक हीरासिंह से बहुत जुड़ी हुई थी।
वह नए मालिक के साथ जाने को तैयार नहीं थी। हीरासिंह ने उसे समझाकर सेठ के साथ भेज
दिया। लेकिन सेठ के यहाँ सुंदरिया ने ठीक से दूध देना बंद कर दिया। बाद में पता
चला कि वह हीरासिंह के प्रेम और अपनापन को बहुत याद करती थी।
एक रात सुंदरिया चुपके से हीरासिंह के पास आ गई। उसकी
आँखों में जैसे पश्चात्ताप और दुख दिखाई दे रहा था। यह देखकर हीरासिंह भावुक हो
गया और उसने निश्चय किया कि वह सुंदरिया को वापस गाँव ले जाएगा। उसने सेठ से कहा
कि वह मेहनत करके उसके पैसे चुका देगा और सुंदरिया को लेकर गाँव चला गया।
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शब्द |
अर्थ |
वाक्य |
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ईर्ष्या |
जलन |
सुंदरिया को देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी। |
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बंदोबस्त |
प्रबंध |
सेठ ने गाय के लिए अच्छे चारे का बंदोबस्त किया। |
|
सिपुर्द |
सौंपना |
सेठ ने गाय को घोसी के सिपुर्द कर दिया। |
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रुसवाई |
अपमान |
हीरासिंह ने कहा, “सुंदरिया, मेरी रुसवाई क्यों कराती है?” |
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विह्वल |
बहुत भावुक |
सुंदरिया को देखकर हीरासिंह विह्वल हो उठा। |
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चाकरी |
नौकरी |
हीरासिंह सेठ के यहाँ चाकरी करता था। |
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कामधेनु |
बहुत अधिक दूध देने वाली गाय |
सुंदरिया दूध देने में कामधेनु जैसी थी। |
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सानी-पानी |
पशु को दिया जाने वाला चारा और पानी |
हीरासिंह ने सुंदरिया को सानी-पानी दिया। |
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एकटक |
लगातार एक ही जगह देखना |
हीरासिंह सुंदरिया को एकटक देखता रहा। |
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लाज से गड़ जाना |
बहुत शर्मिंदा होना |
अपनी बात सुनकर हीरासिंह लाज से गड़ गया। |
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परवरिश |
पालन-पोषण |
माता-पिता अपने बच्चों की अच्छी परवरिश करते हैं। |
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डील-डौल |
शरीर की बनावट |
सुंदरिया का डील-डौल बहुत अच्छा था। |
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मौसी |
माँ की बहन |
जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहता था। |
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प्यारी |
प्रिय |
सुंदरिया हीरासिंह की प्यारी गाय थी। |
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मजबूरी |
विवशता |
गरीबी के कारण हीरासिंह को मजबूरी में गाय बेचनी पड़ी। |
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चारा |
पशुओं का भोजन |
किसान ने गाय के लिए हरा चारा लाया। |
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चौकीदार |
रखवाली करने वाला |
हीरासिंह सेठ के यहाँ चौकीदार था। |
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ईमानदार |
सच्चा और विश्वसनीय |
हीरासिंह एक ईमानदार व्यक्ति था। |
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तनख्वाह |
वेतन |
हीरासिंह को हर महीने तनख्वाह मिलती थी। |
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घोसी |
दूध बेचने वाला व्यक्ति |
घोसी सुंदरिया को अपने साथ ले गया। |
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सहलाना |
प्यार से हाथ फेरना |
हीरासिंह ने सुंदरिया को प्यार से सहलाया। |
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पुचकारना |
प्यार से दुलारना |
हीरासिंह ने सुंदरिया को पुचकारा। |
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बिछोह |
अलग होने का दुख |
सुंदरिया का बिछोह हीरासिंह सहन नहीं कर पाया। |
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क्षमा |
माफी |
हमें अपनी गलती के लिए क्षमा माँगनी चाहिए। |
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अपराधिनी |
अपराध करने वाली |
सुंदरिया स्वयं को अपराधिनी समझ रही थी। |
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पश्चात्ताप |
गलती पर दुख होना |
गलती करने के बाद उसे पश्चात्ताप हुआ। |
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पुनरावृत्ति |
फिर से होना |
आज कहानी की पुनरावृत्ति की गई। |
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पालन-पोषण |
देखभाल करना |
पशुओं का अच्छा पालन-पोषण करना चाहिए। |
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निगाह |
दृष्टि |
उसकी निगाह सुंदरिया पर थी। |
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स्वस्थ |
तंदुरुस्त |
सुंदरिया एक स्वस्थ गाय थी। |
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घोसी |
दूध बेचने वाला |
घोसी गाय को लेकर चला गया। |
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सानी |
पशु का चारा |
किसान ने गाय के लिए सानी तैयार की। |
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थपथपाना |
प्यार से हाथ फेरना |
हीरासिंह ने सुंदरिया को थपथपाया। |
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इनकार |
मना करना |
सुंदरिया ने दूध देने से इनकार कर दिया। |
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सरासर |
बिल्कुल / पूरी तरह |
सेठ ने इसे सरासर धोखा समझा। |
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रकम |
धन |
उसने सेठ की रकम वापस कर दी। |