Thursday, July 23, 2026

कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 3 // चाँद का कुरता

 

कक्षा – 5  // हिन्दी // पाठ - 2 //  चाँद का कुरता

पाठ का सारांश

लेखक – रामधारी सिंह 'दिनकर'

इस कविता में कवि ने कल्पना की है कि चाँद सर्दी से परेशान होकर अपनी माँ से ऊन का मोटा झिंगोला (कुरता) सिलवाने की ज़िद करता है। वह कहता है कि ठंडी हवा के कारण उसे बहुत ठंड लगती है और आसमान की यात्रा करते समय उसे कठिनाई होती है। इसलिए वह अपनी माँ से गरम कुरता सिलवाने की विनती करता है।

चाँद की माँ उसे प्यार से समझाती है कि उसका आकार प्रतिदिन बदलता रहता है। कभी वह बहुत छोटा दिखाई देता है, कभी बड़ा हो जाता है और कभी बिल्कुल दिखाई ही नहीं देता। ऐसे में उसका सही नाप लेना संभव नहीं है। बिना सही नाप के ऐसा कुरता नहीं सिला जा सकता जो उसे हर दिन ठीक से आए।

यह सुनकर चाँद अपनी ज़िद छोड़ देता है। इस कविता के माध्यम से कवि ने चाँद के घटते-बढ़ते आकार को बहुत ही रोचक, हास्यपूर्ण और कल्पनाशील ढंग से प्रस्तुत किया है। साथ ही बच्चों को यह संदेश भी दिया है कि हर ज़िद पूरी नहीं हो सकती और हमें बड़ों की बात समझकर माननी चाहिए। 

 शब्दार्थ :-

 (शब्द) (अर्थ) (वाक्य)
हठज़िदरिया ने नया खिलौना लेने की हठ की।
झिंगोलामोटा ऊनी कुरता या वस्त्रसर्दी में दादी ने मुझे ऊन का झिंगोला पहनाया।
ठिठुरनाठंड से काँपनाबच्चे ठंड में ठिठुर रहे थे।
सफरयात्राहमारा सफर बहुत आनंददायक रहा।
जाड़ासर्दी का मौसमजाड़े में हमें गर्म कपड़े पहनने चाहिए।
भाड़ाकिरायाहमने बस का भाड़ा समय पर दिया।
कुशलसुरक्षित एवं स्वस्थभगवान सभी को कुशल रखें।
टोनाजादू-टोनाहमें टोना-टोटका जैसी बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
अंगुल-भरएक उँगली जितनाउसने अंगुल-भर जगह में पौधा लगाया।
घटताकम होनागर्मियों में तालाब का पानी घटता है।
बढ़ताअधिक होनाबरसात में नदी का जलस्तर बढ़ता है।
नापमापदर्जी ने मेरी शर्ट का नाप लिया।
सिलवानासिलने के लिए देनामाँ ने मेरे लिए नया कुर्ता सिलवाया।
मौसमऋतु या वातावरणआज का मौसम बहुत सुहावना है।
दिखाई पड़नानज़र आनारात में आकाश में अनेक तारे दिखाई पड़ते हैं।
सलोनासुंदर और आकर्षकसलोना चाँद सभी का मन मोह लेता है।
बदलनापरिवर्तन होनाचाँद का आकार प्रतिदिन बदलता है।
प्रतिदिनहर दिनहमें प्रतिदिन समय पर पढ़ाई करनी चाहिए।
गायबदिखाई न देनाबादलों में चाँद गायब हो गया।
आसमानआकाशआसमान में इंद्रधनुष बहुत सुंदर दिखाई दे रहा था।

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