Saturday, January 24, 2026

कक्षा – 4 // हिन्दी // पाठ - 12 // शतरंज में मात

 

कक्षा – 4  // हिन्दी // पाठ - 12 //  शतरंज में मात

पाठ का सारांश :-

यह नाटक तेनालीरामन की बुद्धिमत्ता पर आधारित है। राजा कृष्णदेव राय के दरबार में दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या करते थे। वे राजा और तेनाली के बीच शतरंज का खेल रखवाते हैं। तेनाली शतरंज नहीं जानता, फिर भी अपनी चतुराई से जानबूझकर हार जाता है। राजा क्रोधित होकर तेनाली को दंड देना चाहते हैं, पर तेनाली अपनी बुद्धि से मुण्डन के दंड से भी बच जाता है और पाँच हजार अशर्फियाँ भी प्राप्त कर लेता है। नाटक हमें सिखाता है कि बुद्धि बल से बड़ी होती है।

 नए शब्द – अर्थ – वाक्य

1. ईर्ष्या
अर्थ: दूसरों की सफलता से जलन
वाक्य: दरबारी तेनालीरामन की बुद्धि से ईर्ष्या करते थे।

2. दरबार
अर्थ: राजा की सभा
वाक्य: राजा कृष्णदेव राय का दरबार बहुत प्रसिद्ध था।

3. विदूषक
अर्थ: हास्य और बुद्धि से बात कहने वाला व्यक्ति
वाक्य: तेनालीरामन राजा के दरबार के विदूषक थे।

4. चतुराई
अर्थ: समझदारी और होशियारी
वाक्य: तेनाली ने अपनी चतुराई से संकट टाल दिया।

5. अपमान
अर्थ: बेइज्जती
वाक्य: दरबारियों ने तेनाली का अपमान करने की योजना बनाई।

6. दंड
अर्थ: सजा
वाक्य: राजा ने तेनाली को दंड देने की घोषणा की।

7. मुण्डन
अर्थ: सिर के बाल कटवाना
वाक्य: राजा ने तेनाली को मुण्डन का दंड दिया।

8. अशर्फियाँ
अर्थ: सोने के सिक्के
वाक्य: तेनाली को पाँच हजार अशर्फियाँ मिलीं।

9. प्रार्थना
अर्थ: ईश्वर से विनती
वाक्य: तेनाली ने शांति से प्रार्थना की।

10. क्रोध
अर्थ: गुस्सा
वाक्य: खेल हारने पर राजा को बहुत क्रोध आया।

11. उपाय
अर्थ: समस्या का हल
वाक्य: तेनाली ने बुद्धि से एक उपाय निकाला।

12. भय
अर्थ: डर
वाक्य: दंड सुनकर दरबारी भयभीत हो गए।

13. संकट
अर्थ: कठिन स्थिति
वाक्य: तेनाली ने संकट को अवसर में बदल दिया।

14. बुद्धिमत्ता
अर्थ: तेज दिमाग
वाक्य: तेनालीरामन अपनी बुद्धिमत्ता के लिए प्रसिद्ध थे।

15. सभा
अर्थ: लोगों की बैठक
वाक्य: दरबार की सभा में सभी उपस्थित थे।

16. षड्यंत्र
अर्थ: किसी को हानि पहुँचाने की गुप्त योजना
वाक्य: दरबारियों ने तेनाली को फँसाने का षड्यंत्र रचा।

17. न्योता
अर्थ: आमंत्रण
वाक्य: राजा ने तेनाली को शतरंज खेलने का न्योता दिया।

18. प्रशंसा
अर्थ: तारीफ
वाक्य: राजा ने अंत में तेनाली की प्रशंसा की।

19. लज्जित
अर्थ: शर्मिंदा
वाक्य: अपनी चाल असफल होने पर दरबारी लज्जित हो गए।

20. साहस
अर्थ: हिम्मत
वाक्य: तेनाली ने साहस से राजा के सामने अपनी बात रखी।

21. विवेक
अर्थ: सही-गलत की समझ
वाक्य: विवेक से लिया गया निर्णय संकट टाल देता है।

22. चकित
अर्थ: हैरान
वाक्य: तेनाली की बात सुनकर राजा चकित रह गए।

23. धैर्य
अर्थ: सब्र
वाक्य: तेनाली ने धैर्य से परिस्थिति को संभाला।

24. अनुचित
अर्थ: जो सही न हो
वाक्य: बिना सोचे दंड देना अनुचित है।

25. उचित
अर्थ: सही और न्यायपूर्ण
वाक्य: राजा ने अंत में उचित निर्णय लिया।

26. छल
अर्थ: धोखा
वाक्य: दरबारियों ने छल से तेनाली को हराने की कोशिश की।

27. संकटमोचक
अर्थ: संकट दूर करने वाला
वाक्य: तेनाली अपनी बुद्धि से संकटमोचक बने।

28. परामर्शदाता
अर्थ: सलाह देने वाला
वाक्य: तेनाली राजा के परामर्शदाता थे।

29. निर्णय
अर्थ: अंतिम फैसला
वाक्य: राजा ने सोच-समझकर निर्णय बदला।

30. विजय
अर्थ: जीत
वाक्य: बुद्धि की विजय बल से बड़ी होती है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. “शतरंज में मात” पाठ किस पर आधारित है?
(क) राजा की शक्ति पर                          (ख) दरबारियों की चालाकी पर
(
ग) तेनालीरामन की बुद्धिमत्ता पर         (घ) युद्ध की कहानी पर

उत्तर: (ग) तेनालीरामन की बुद्धिमत्ता पर

2. तेनालीरामन किस राजा के दरबार में रहते थे?
(क) अकबर        (ख) हर्षवर्धन         (ग) कृष्णदेव राय          (घ) अशोक

उत्तर: (ग) कृष्णदेव राय

3. दरबारी तेनालीरामन से क्यों ईर्ष्या करते थे?
(क) उसकी संपत्ति से            (ख) उसकी बुद्धि और प्रशंसा से
(
ग) उसकी उम्र से                (घ) उसकी शक्ति से

उत्तर: (ख) उसकी बुद्धि और प्रशंसा से

4. दरबारियों ने तेनाली को नीचा दिखाने के लिए क्या योजना बनाई?
(क) नाटक करवाया         (ख) कविता सुनवाई          (ग) शतरंज का खेल रखवाया      (घ) पहेली पूछी

उत्तर: (ग) शतरंज का खेल रखवाया

5. तेनालीरामन शतरंज के बारे में क्या कहते हैं?
(क) वे बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं                             (ख) उन्हें शतरंज का ज्ञान नहीं
(
ग) वे राजा से बेहतर खेलते हैं                          (घ) वे खेलना पसंद नहीं करते

उत्तर: (ख) उन्हें शतरंज का ज्ञान नहीं

6. राजा तेनाली से क्यों क्रोधित हो गए?
(क) तेनाली जीत रहा था                (ख) तेनाली जानबूझकर हार रहा था
(
ग) तेनाली खेल छोड़ रहा था         (घ) तेनाली देर से आया था

उत्तर: (ख) तेनाली जानबूझकर हार रहा था

7. राजा ने तेनाली को कौन-सा दंड देने का आदेश दिया?
(क) कारावास          (ख) जुर्माना           (ग) मुण्डन             (घ) देश निकाला

उत्तर: (ग) मुण्डन

8. तेनाली मुण्डन से बचने के लिए क्या करता है?
(क) राजा से माफी माँगता है                 (ख) दरबार छोड़ देता है
(
ग) धार्मिक तर्क देता है                        (घ) भाग जाता है

उत्तर: (ग) धार्मिक तर्क देता है

9. तेनाली के अनुसार मुण्डन कब किया जाता है?
(क) विवाह पर            (ख) जन्म पर          (ग) माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर         (घ) राजा के आदेश पर

उत्तर: (ग) माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर

10. राजा ने अंत में क्या निर्णय लिया?
(क) दंड बढ़ा दिया       (ख) तेनाली को निकाल दिया          (ग) दंड वापस ले लिया      (घ) तेनाली को जेल भेजा

उत्तर: (ग) दंड वापस ले लिया

11. तेनाली को कितनी अशर्फियाँ मिलीं?
(क) सौ             (ख) एक हजार            (ग) पाँच हजार             (घ) दस हजार

उत्तर: (ग) पाँच हजार

12. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
(क) शक्ति सबसे बड़ी होती है                                (ख) राजा कभी गलत नहीं होता
(
ग) बुद्धि बल से बड़ी होती है                              (घ) खेल समय की बर्बादी है

उत्तर: (ग) बुद्धि बल से बड़ी होती है

बहुत लघु उत्तर

1. तेनालीरामन कौन थे?
उत्तर: राजा कृष्णदेव राय के दरबार के विदूषक और परामर्शदाता थे।

2. तेनालीरामन किस राजा के दरबार में रहते थे?
उत्तर: राजा कृष्णदेव राय के।

3. दरबारियों ने राजा से तेनाली के बारे में क्या कहा?

उत्तर: उन्होंने कहा कि तेनाली शतरंज का बहुत बड़ा खिलाड़ी है।

4. क्या तेनाली शतरंज जानते थे?
उत्तर: नहीं, तेनाली शतरंज नहीं जानते थे।

5. राजा तेनाली पर क्यों क्रोधित हुए?
उत्तर: क्योंकि तेनाली खेल में जानबूझकर हार रहा था।

6. राजा ने तेनाली को कौन-सा दंड दिया?
उत्तर: मुण्डन (सिर के बाल कटवाना)।

7. तेनाली मुण्डन से बचने के लिए क्या करता है?
उत्तर: धार्मिक तर्क देता है।

8. तेनाली के अनुसार मुण्डन कब किया जाता है?
उत्तर: माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर।

9. तेनाली को कितनी अशर्फियाँ मिलीं?
उत्तर: पाँच हजार अशर्फियाँ।

10. अंत में राजा ने क्या निर्णय लिया?
उत्तर: दंड वापस ले लिया।

11. इस पाठ का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: बुद्धि बल से बड़ी होती है।

12. तेनाली ने संकट को किसमें बदला?
उत्तर: अवसर में।

13. राजा का स्वभाव कैसा दिखाया गया है?
उत्तर: क्रोधी लेकिन समझदार।

लघु उत्तर

1. दरबारी तेनालीरामन से ईर्ष्या क्यों करते थे?

उत्तर: तेनालीरामन बहुत बुद्धिमान थे और राजा उनकी बातों से प्रभावित रहते थे। राजा अक्सर तेनाली की प्रशंसा करते थे। इसी कारण दरबारी उनसे जलते थे और उन्हें नीचा दिखाना चाहते थे।

2. दरबारियों ने तेनाली को फँसाने के लिए क्या योजना बनाई?

उत्तर: दरबारियों ने राजा और तेनाली के बीच शतरंज का खेल रखवाने की योजना बनाई। उन्हें लगा कि तेनाली खेल नहीं जानता और हारकर उसका अपमान होगा। इसी से राजा तेनाली से नाराज़ हो जाएगा।

3. तेनाली ने शतरंज खेलते समय जानबूझकर हार क्यों स्वीकार की?

उत्तर: तेनाली शतरंज खेलना नहीं जानते थे। वे राजा का अपमान नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने जानबूझकर हार स्वीकार की और अपनी बुद्धि से आगे की स्थिति को संभालने का निश्चय किया।

4. राजा तेनाली पर क्रोधित क्यों हो गए?

उत्तर: राजा को लगा कि तेनाली जानबूझकर गलत चालें चल रहा है। उन्हें यह राजा का अपमान प्रतीत हुआ। इसी कारण राजा को बहुत क्रोध आया।

5. मुण्डन का दंड मिलने पर तेनाली ने क्या किया?

उत्तर: तेनाली ने शांति से राजा से बात की। उन्होंने धार्मिक तर्क देकर कहा कि मुण्डन माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर होता है। इस बात से राजा सोच में पड़ गए।

6. तेनाली मुण्डन से कैसे बच गया?

उत्तर: तेनाली ने कहा कि राजा अब उसके माता-पिता के समान हैं। यदि उनके सामने मुण्डन हुआ तो राजा पर अनिष्ट हो सकता है। यह सुनकर राजा डर गए और दंड वापस ले लिया।

7. अंत में राजा ने तेनाली के साथ कैसा व्यवहार किया?

उत्तर: राजा तेनाली की बुद्धि से बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने दंड माफ कर दिया और तेनाली को अशर्फियाँ भी दीं। राजा ने उसकी चतुराई की प्रशंसा की।

8. “शतरंज में मात” शीर्षक क्यों उपयुक्त है?

उत्तर: इस कहानी में तेनाली शतरंज में नहीं, बल्कि बुद्धि से जीतता है। उसने अपनी चतुराई से राजा और दरबारियों को मात दी। इसलिए कहानी का शीर्षक “शतरंज में मात” उपयुक्त है।

9. इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: यह पाठ सिखाता है कि बुद्धि और सूझ-बूझ बल से अधिक शक्तिशाली होती है। कठिन परिस्थितियों में धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए।

दीर्घ उत्तर

1. तेनालीरामन ने शतरंज का खेल न जानते हुए भी संकट से कैसे छुटकारा पाया?

उत्तर: तेनालीरामन शतरंज खेलना नहीं जानते थे, फिर भी उन्होंने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने जानबूझकर हार स्वीकार की ताकि राजा का सीधा अपमान न हो। बाद में राजा ने क्रोध में उन्हें मुण्डन का दंड दिया। उस समय तेनाली ने धार्मिक और तार्किक बात कहकर राजा को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि मुण्डन माता-पिता के स्वर्ग सिधारने पर होता है। इस बुद्धिमानी से वे दंड से भी बच गए।

2. दरबारियों की योजना कैसे असफल हो गई?

उत्तर: दरबारियों ने तेनाली को नीचा दिखाने के लिए शतरंज का खेल रखवाया था। उन्हें लगा कि तेनाली हार जाएगा और उसका अपमान होगा। लेकिन तेनाली ने अपनी चतुराई से स्थिति को अपने पक्ष में कर लिया। मुण्डन के समय उसने ऐसी बात कही जिससे राजा डर गए। इस प्रकार दरबारियों की चाल उलटी पड़ गई और उनकी योजना असफल हो गई।

3. राजा कृष्णदेव राय का चरित्र चित्रण कीजिए।

उत्तर: राजा कृष्णदेव राय एक शक्तिशाली और सम्मानप्रिय राजा थे। वे अपने अपमान को सहन नहीं करते थे, इसलिए क्रोधित हो गए। लेकिन वे बुद्धिमान भी थे और सही बात समझने की क्षमता रखते थे। तेनाली की बात सुनकर उन्होंने अपना निर्णय बदल लिया। इससे पता चलता है कि राजा न्यायप्रिय और विवेकशील थे।

4. तेनालीरामन का चरित्र इस नाटक में कैसे उभरकर आता है?

उत्तर: तेनालीरामन बहुत बुद्धिमान, धैर्यवान और साहसी व्यक्ति थे। वे कठिन परिस्थितियों में भी घबराते नहीं थे। शतरंज न जानते हुए भी उन्होंने स्थिति को समझदारी से संभाला। मुण्डन के समय उनकी सूझ-बूझ ने उन्हें बचा लिया। उनका चरित्र हमें चतुराई और विवेक का महत्व सिखाता है।

5. “शतरंज में मात” पाठ से हमें क्या-क्या शिक्षाएँ मिलती हैं?

उत्तर: इस पाठ से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बुद्धि बल से अधिक शक्तिशाली होती है। हर समस्या का समाधान धैर्य और समझदारी से निकाला जा सकता है। ईर्ष्या और छल का अंत हमेशा बुरा होता है। कठिन समय में घबराने के बजाय सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। यह कहानी आत्मविश्वास का भी संदेश देती है।

6. मुण्डन प्रसंग कहानी का सबसे महत्वपूर्ण भाग क्यों है?

उत्तर: मुण्डन प्रसंग में तेनाली की असली बुद्धिमत्ता दिखाई देती है। इसी समय वे सबसे बड़े संकट में होते हैं। उन्होंने धार्मिक विश्वास और तर्क का सहारा लेकर राजा को भ्रम में डाल दिया। राजा डर गए और दंड वापस ले लिया। इस प्रसंग से कहानी का उद्देश्य स्पष्ट हो जाता है।

 बातचीत के लिए

1. आपको यह नाटक कैसा लगा और क्यों?
उत्तर: यह नाटक बहुत रोचक और शिक्षाप्रद लगा क्योंकि इसमें तेनालीरामन ने अपनी बुद्धि से बड़ी समस्या को हल किया। कहानी से हमें सोच-समझकर काम करने की शिक्षा मिलती है।

2. आपने तेनालीरामन जैसे किस्से और किसके सुने हैं?
उत्तर: हमने अकबर–बीरबल के बुद्धिमत्ता के किस्से सुने हैं।

3. क्या आपने कभी कठिन परिस्थिति को संभाला है?
उत्तर: हाँ, मैंने धैर्य और समझदारी से कठिन परिस्थिति को संभाला है।

4. यदि तेनालीरामन शतरंज जानते तो नाटक का अंत क्या होता?
उत्तर: तेनाली खेल जीत जाते और मुण्डन का प्रसंग नहीं आता।

5. घर में खेले जाने वाले खेलों में आपको कौन-सा खेल अच्छा लगता है?
उत्तर: मुझे शतरंज अच्छा लगता है। यह मोहरों से खेला जाता है।

6. दरबारियों की योजना क्यों असफल हो गई?

उत्तर: क्योंकि तेनालीरामन ने अपनी बुद्धि से स्थिति को पलट दिया।

7. तेनाली की जगह आप होते तो क्या करते?

उत्तर: मैं भी शांति और समझदारी से समस्या का समाधान करता।

🔹 किसने, किससे कहा?

  1. शतरंज? क्या तेनालीरामन शतरंज के शौकीन हैं?”
    उत्तर: राजा ने दरबारियों से।
  2. और यह है मेरा दाँव।”
    उत्तर: तेनालीरामन ने राजा से।
  3. अरे, इतने महान आदमी का मुण्डन!”
    उत्तर: नाई ने राजा से।
  4. हाँ महाराज, बड़े-बड़ों को मात दी है तेनाली ने।”
    उत्तर: दरबारियों ने राजा से।
  5. उठो, उठो! तुम्हें कोई दंड नहीं मिल रहा।”
    उत्तर: राजा ने नाई से।

🔹 भाषा की बात

1. मिलान (शब्द – अर्थ)

  • प्रशंसा बड़ाई, तारीफ
  • युक्ति उपाय
  • मात हार
  • घाघ चालाक
  • माहिर कुशल
  • न्योता आमंत्रण

2. रिक्त स्थान भरिए (विशेषण)

  • कुशल खिलाड़ी
  • महान तेनाली
  • चतुर चाल
  • बुद्धिमान आदमी
  • पाँच हजार अशर्फियाँ

3. मनोभाव के संवाद

प्रसन्न:
मेरी खोई हुई पुस्तक मिल गई है!”

चकित:
अरे! यह तो मैंने सोचा ही नहीं था।”

शांत:
सब ठीक है, घबराने की जरूरत नहीं।”

दुखी:
मुझे यह सुनकर बहुत दुख हुआ।”

4. नए शब्द बनाइए

(क) किसी को आने के लिए कहना आमंत्रण
(
ख) जाना का विपरीत आना
(
ग) कृतज्ञता प्रकट करना आभार
(
घ) आना या पहुँचना आगमन
(
ङ) जो बहुत जरूरी हो आवश्यक

🔹 पाठ से आगे

1. शतरंज के मोहरों की चाल लिखिए।

  • घोड़ा – ढाई घर की चाल
  • हाथी – सीधी चाल
  • मंत्री – सभी दिशाओं में
  • राजा – एक घर
  • ऊँट – तिरछी चाल
  • प्यादा (सिपाही) – एक घर आगे
  • रानी – किसी भी दिशा में

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