Sunday, July 12, 2026

कक्षा – 5 // हिन्दी // पाठ - 2 // न्याय की कुर्सी

 

कक्षा – 5  // हिन्दी // पाठ - 2 //  न्याय की कुर्सी

पाठ का सारांश

यह कहानी हमारे देश की सैकड़ों वर्ष पुरानी एक पुस्तक पर आधारित है। उस पुस्तक का नाम है सिंहासन बत्तीसी ।

इस पुस्तक में राजा भोज को भूमि में गड़ा राजा विक्रमादित्य का सिंहासन मिलता है जिसमें बत्तीस मूर्तियाँ जड़ी होती हैं। प्रत्येक मूर्ति राजा भोज को राजा विक्रमादित्य की एक कहानी सुनाती है। इस पुस्तक की प्रत्येक कहानी बहुत रोचक है।

'न्याय की कुर्सी' कहानी उज्जैन नगर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। नगर के बाहर एक टीले पर बच्चे खेलते थे। एक दिन एक लड़का पत्थर पर बैठकर राजा बनने का खेल खेलने लगा और अपने साथियों के झगड़ों का निष्पक्ष निर्णय करने लगा। धीरे-धीरे उसकी न्यायप्रियता की चर्चा पूरे नगर में फैल गई। लोग अपने वास्तविक विवाद भी उसी लड़के के पास लेकर आने लगे और उसके न्याय से संतुष्ट होने लगे।

जब यह बात राजा तक पहुँची, तो वह स्वयं वहाँ गया। उसने देखा कि लड़का सचमुच बहुत बुद्धिमानी और निष्पक्षता से न्याय कर रहा है। खुदाई कराने पर पता चला कि वह साधारण पत्थर नहीं, बल्कि महान न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य का सिंहासन था। राजा ने उस सिंहासन को अपने दरबार में मँगवाया और उस पर बैठने का प्रयास किया।

जैसे ही राजा सिंहासन पर बैठने लगा, सिंहासन की मूर्तियाँ एक-एक करके उसे रोकने लगीं। उन्होंने राजा से पूछा कि क्या उसने कभी चोरी, झूठ या किसी के साथ अन्याय नहीं किया। राजा अपनी गलतियों को स्वीकार करता गया। अंत में चौथी मूर्ति ने बताया कि इस सिंहासन पर वही बैठ सकता है जिसके मन में कोई छल, कपट या अहंकार न हो। जब राजा फिर भी बैठने का प्रयास करने लगा, तो चौथी मूर्ति सिंहासन सहित आकाश में उड़ गई।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा न्याय केवल वही व्यक्ति कर सकता है जो ईमानदार, सत्यवादी, निष्पक्ष, विनम्र और सदाचारी हो। केवल शक्ति, धन या पद किसी को न्याय करने योग्य नहीं बनाते; श्रेष्ठ चरित्र ही वास्तविक योग्यता है। 

 शब्दार्थ :-

न्याय

सही और निष्पक्ष फैसला

न्याय हमेशा सत्य के आधार पर होना चाहिए।

फरियाद

शिकायत

किसान अपनी फरियाद लेकर राजा के पास गया।

दरबारी

राजा के दरबार का सदस्य

दरबारी राजा की सहायता करते थे।

गवाही

सच्ची बात बताना

गवाह ने न्यायालय में गवाही दी।

फैसला

निर्णय

शिक्षक ने सही फैसला सुनाया।

विवेक

सही-गलत समझने की शक्ति

विवेक से लिया गया निर्णय सही होता है।

स्तंभित

आश्चर्यचकित

राजा लड़के का न्याय देखकर स्तंभित रह गया।

चमत्कार

अद्भुत घटना

लोगों ने इसे चमत्कार माना।

सिंहासन

राजा की राजगद्दी

राजा सिंहासन पर बैठा।

मूर्ति

प्रतिमा

मंदिर में सुंदर मूर्ति है।

प्रायश्चित

गलती का पश्चाताप

गलती के बाद उसने प्रायश्चित किया।

उपवास

भोजन न करना

दादी सोमवार का उपवास रखती हैं।

लज्जा

शर्म

अपनी गलती पर उसे लज्जा आई।

कलुष

मन की बुराई

हमें अपने मन का कलुष दूर करना चाहिए।

योग्य

सक्षम

वह पुरस्कार पाने के योग्य है।

विवेकशील

समझदार

विवेकशील व्यक्ति सोच-समझकर निर्णय लेता है।

अपराधी

अपराध करने वाला

अपराधी को दंड मिला।

बयान

कही गई बात

पुलिस ने सभी के बयान लिखे।

शिकायत

किसी बात की फरियाद

छात्र ने अपनी शिकायत शिक्षक को बताई।

आत्मविश्वास

स्वयं पर विश्वास

आत्मविश्वास सफलता की कुंजी है।

लाव-लश्कर

सैनिकों और सेवकों का दल

राजा लाव-लश्कर के साथ निकला।

आज्ञा

आदेश

सैनिक ने राजा की आज्ञा मानी।

भोले-भाले

सरल और निष्कपट

छोटे बच्चे भोले-भाले होते हैं।

पछतावा

गलत काम का दुःख

झूठ बोलने पर उसे पछतावा हुआ।

निष्पक्ष

बिना पक्षपात के

न्यायाधीश ने निष्पक्ष निर्णय दिया।

 बातचीत के लिए

1. आपका प्रिय खेल कौन-सा है? आप उसे कैसे खेलते हैं ?
उत्तर: मेरा प्रिय खेल क्रिकेट है। इसमें दो टीमें होती हैं और प्रत्येक टीम में ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। एक टीम बल्लेबाजी करती है और दूसरी टीम गेंदबाजी व क्षेत्ररक्षण करती है। बल्लेबाज रन बनाने की कोशिश करता है और गेंदबाज उसे आउट करने का प्रयास करता है। निर्धारित ओवरों के अंत में जो टीम अधिक रन बनाती है वही विजेता होती है।

हमारा प्रिय खेल लूडो है। लूडो एक बोर्ड पर खेला जाने वाला खेल है, जिसमें निर्धारित रंग व खाने होते हैं। आजकल लूडो मोबाइल में भी उपलब्ध है। इस खेल में कम-से-कम दो खिलाड़ी और ज़्यादा से ज़्यादा चार खिलाड़ी खेलते हैं। इसे हम अपने भाई – बहन और माता-पिता के साथ खेलते हैं। इसमें अलग-अलग रंग की चार गोटियाँ होती हैं और पासे में आए अंकों के अनुसार इन्हें आगे बढ़ाते जाते हैं, जिसकी चारों गोटियाँ पहले घर में पहुँच जाती हैं, वही विजेता होता है।

(इस प्रकार विद्यार्थी अन्य खेल के बारे में लिख सकते हैं।

2. क्या आपने कभी किसी समस्या का समाधान किया है? अपना अनुभव साक्षा कीजिए ।
उत्तर: हाँ, मेरा अनुभव कुछ इस प्रकार है- एक बार मेरे मित्र की एक किताब नहीं मिल रही थी। उसे लगा कि वह चोरी हो गई है। उसने सब जगह ढूँढ़ लिया था। आखिर में मैंने उसे याद दिलाया कि वह किताब तो तुम ट्यूशन में ले गए थे। कहीं तुम उसे वहाँ तो छोड़ नहीं आए हो ।

हाँ, मैंने एक बार समस्या का समाधान किया था। हमारे घर का बल्ब अचानक फ्यूज़ हो गया और अंधेरा हो गया। मैंने हिम्मत करके पुराना बल्ब उतारा और नया बल्ब लगा दिया। बिजली आते ही सब खुश हो गए। मुझे भी बहुत अच्छा लगा कि मैंने एक समस्या का हल निकाला।

(विद्यार्थी स्वयं के अनुभव के आधार पर उत्तर दें ।)

3. यदि आप राजा के स्थान पर होते और आपको लड़के के बारे में पता चलता तो आप क्या करते?
उत्तर: यदि मैं राजा के स्थान पर होता तो मैं लड़के को दरबार में बुलाकर पूछता की उसकी बुद्धिमत्ता और न्याय-बुद्धि के बारे में पूछता। फिर मैं उससे कहता कि वह दरबार में रहकर न्याय करने में मदद करे।

4. लड़के के अंदर ऐसे कौन-कौन से गुण होंगे, जिनके कारण वह सिंहासन पर बैठ पा रहा था ?
उत्तर: लड़का बहुत भोला-भाला था। उसके मन में कलुष नहीं था । वह साफ़ – सरल हृदय का था। छल-कपट उसमें नहीं था। इस कारण वह सिंहासन पर बैठ पा रहा था ।

 पाठ से

नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर के आगे तारे का चिह्न Class 5 Hindi Chapter 2 Question Answer न्याय की कुर्सी 1 बनाइए । एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं-

प्रश्न 1. राजा को लड़के द्वारा न्याय करने के विषय में कैसे पता चला?
उत्तर: (ख) लोगों द्वारा लड़के के न्याय की प्रशंसा सुनकर Class 5 Hindi Chapter 2 Question Answer न्याय की कुर्सी 1

प्रश्न 2. राजा को सबसे अधिक आश्चर्य किस बात से हुआ ?
उत्तर: (ग) सिंहासन पर बैठने वाला लड़का सही न्याय करता था । Class 5 Hindi Chapter 2 Question Answer न्याय की कुर्सी 1

प्रश्न 3. लड़कों को यह खेल इतना अच्छा क्यों लगा कि वे प्रतिदिन इसे खेलने लगे?
उत्तर: (ख) क्योंकि यह अन्य खेलों से अधिक मनोरंजक था। Class 5 Hindi Chapter 2 Question Answer न्याय की कुर्सी 1

प्रश्न 4. राजा ने उपवास और प्रायश्चित क्यों किया?
उत्तर: (क) ताकि वह सिंहासन पर बैठने के योग्य बन सके। Class 5 Hindi Chapter 2 Question Answer न्याय की कुर्सी 1
(
ख) क्योंकि उसे अपने कर्मों पर पछतावा था । Class 5 Hindi Chapter 2 Question Answer न्याय की कुर्सी 1

सोचिए और लिखिए

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए ।

(क) सभी लड़के सिंहासन पर बैठ पा रहे थे लेकिन राजा नहीं बैठ पाया। ऐसा क्यों?
उत्तर: सभी लड़के सिंहासन पर बैठ पा रहे थे, लेकिन राजा नहीं बैठ पाया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि वे भोले-भाले बच्चे थे और उनके मन में किसी के प्रति मैल नहीं था। साथ ही उनका हृदय निर्मल था। लेकिन राजा का मन ऐसा नहीं था, इसलिए वह सिंहासन पर नहीं बैठ पाया।

(ख) क्या राजा को प्रायश्चित करने के बाद सिंहासन पर बैठने का अधिकार मिलना चाहिए था ? अपने उत्तर का कारण भी बताइए ।
उत्तर: नहीं, राजा को प्रायश्चित करने के बाद भी सिंहासन पर बैठने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए था, क्योंकि तीन बार प्रायश्चित करने के बाद भी वह अपने आप को सबसे अधिक धनवान, बलवान और बुद्धिमान मानता अगर वह योग्य होता तो चौथी मूर्ति सिंहासन लेकर आसमान में नहीं उड़ती ।

(ग) दोनों किसानों ने अपने झगड़े के निपटारे के लिए राजा के दरबार में जाने के बजाय लड़के के पास जाने का फ़ैसला क्यों किया?
उत्तर: नगर में लड़के की न्याय-बुद्धि की बहुत चर्चा थी। लोग कहने लगे थे कि उस लड़के में कोई दैवी शक्ति है। इन्हीं बातों से प्रभावित होकर दोनों किसानों ने राजा के दरबार में जाने के बजाय लड़के के पास जाने का फ़ैसला किया।

(घ) चौथी मूर्ति सिंहासन के साथ आकाश में क्यों उड़ गई ?
उत्तर: प्रायश्चित करने के बाद भी राजा का अपने धन, बल और बुद्धि के प्रति अभिमान देख कर चौथी मूर्ति सिंहासन के साथ आकाश में उड़ गई।

(ङ) इस कहानी को एक नया शीर्षक दीजिए और बताइए कि आपने यह शीर्षक क्यों चुना?
उत्तर: सच्चा न्यायकर्ता’ इस कहानी का एक नया शीर्षक हो सकता है, क्योंकि इस सिंहासन पर कोई सच्चा व्यक्ति ही बैठ सकता था जो भोला-भाला हो तथा उसके मन में किसी के प्रति छल-कपट न हो।

मैं इस कहानी का शीर्षक “न्यायी बालक” रखूँगा। मैंने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि इस कहानी में एक छोटे लड़के ने अपनी बुद्धिमत्ता और निष्पक्षता से सबको न्याय दिया। कहानी का मुख्य केंद्र वही लड़का है, इसलिए यह शीर्षक सबसे उचित है।

(विद्यार्थी स्वयं के अनुभव के आधार पर उत्तर दें ।)

अनुमान और कल्पना

प्रश्न 1. कहानी में सिंहासन की मूर्तियाँ उड़कर किसी और जगह चली जाती हैं। वे कहाँ जाती होंगी और वहाँ क्या करती होंगी?
उत्तर: सिंहासन की मूर्तियाँ उड़कर स्वर्ग लोक में चली जाती होंगी। वहाँ वे देवताओं और लोगों को यह बताती होंगी कि केवल सच्चा, मन से साफ़ और निष्कपट व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में न्याय कर सकता है।

प्रश्न 2. यदि इस कहानी के अंत में राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता तो क्या होता?
उत्तर: यदि राजा सिंहासन पर बैठने में सफल हो जाता तो वह और भी घमंडी बन जाता। वह स्वयं को सबसे बड़ा और न्यायप्रिय मानता, जबकि सच यह था कि उसके मन में लालच और अहंकार था। तब लोगों का विश्वास न्याय से उठ जाता और अन्याय फैल जाता।

भाषा की बात

प्रश्न 1. अब नीचे दिए गए वाक्यों में उचित स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए ।

यह तो और भी आश्चर्य की बात है हो न हो पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है मैं इसकी जाँच करूँगा
यह तो और भी आश्चर्य की बात है! हो न हो, पत्थर की इस कुर्सी में ही कोई चमत्कार है। मैं इसकी जाँच करूँगा।”

इस प्रकार के चिह्नों को ‘विराम चिह्न’ कहते हैं। विराम चिह्नों से पता चलता है कि लिखे हुए वाक्यों में कहाँ ठहराव है और उनका क्या भाव है।

अब नीचे दिए गए वाक्यों में उचित स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए-

(क) चौथी मूर्ति ने कहा ठहरो जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे वे भोले भाले थे उनके मन में कलुष नहीं था अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो
उत्तर: चौथी मूर्ति ने कहा, “ ठहरो! जो लड़के इस सिंहासन पर बैठते थे, वे भोले-भाले थे। उनके मन में कलुष नहीं था। अगर तुमको विश्वास है कि तुम इस योग्य हो तो इस सिंहासन पर बैठ सकते हो ।

(ख) राजा बड़ी देर तक सोचता रहा फिर उसने मन ही मन कहा अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ मैं राजा हूँ मुझसे ज्यादा धनवान बलवान और बुद्धभा और कौन होगा मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ
उत्तर: राजा बड़ी देर तक सोचता रहा। फिर उसने मन ही मन कहा, “अगर एक लड़का इस पर बैठ सकता है तो भला मैं क्यों नहीं बैठ सकता हूँ। मैं राजा हूँ । मुझसे ज्यादा धनवान, बलवान और बुद्धिमान भला और कौन होगा? मैं अवश्य इस सिंहासन पर बैठने योग्य हूँ।”

प्रश्न 2. “तीसरी मूर्ति भी उड़ गई।” इस वाक्य के आधार पर प्रश्नों के उत्तर लिखिए ।

(क) इस वाक्य में संज्ञा शब्द कौन-सा है?
उत्तर: मूर्ति

(ख) कौन – सा शब्द इस संज्ञा शब्द के गुण या विशेषता को बता रहा है?
उत्तर: तीसरी

प्रश्न 3. कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इनमें विशेषण शब्द पहचानकर उनके नीचे रेखा खींचिए ।
(क) एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
(
ख) उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था ।
(
ग) इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।
(
घ) राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था ।
(
ङ) बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।
उत्तर:
(क) एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था।
(
ख) उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था ।
(
ग) इतनी छोटी उम्र में इतनी बुद्धि का होना आश्चर्य की बात है।
(
घ) राजा ने देखा कि वह पत्थर नहीं, बहुत ही सुंदर सिंहासन था ।
(
ङ) बात ही बात में वहाँ अच्छी खासी भीड़ जमा हो गई।

प्रश्न4. आपमें कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए जिससे आप कहानी के सिंहासन पर बैठ सकें? लिखिए ।

 उत्तर: सिंहासन पर बैठने के लिए मेरे अंदर ये विशेषताएँ होनी चाहिए –

1. दयालु होना
2.
सत्यवादी होना
3.
निष्पक्ष होना
4.
ईमानदार होना
5.
न्यायप्रिय होना
6.
बुद्धिमान होना
7.
निष्कपट हृदय होना

पाठ से आगे

प्रश्न 1. कहानी में गाँव वाले न्याय करवाने या झगड़े सुलझाने बच्चों के पास जाया करते थे। आप अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए किन-किनके पास जाते हैं? आप उन्हीं के पास क्यों जाते हैं?
उत्तर: मैं अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए अपने शिक्षकों, माता-पिता और परिवार के अन्य बड़े सदस्यों के पास जाता हूँ। मैं इन्हीं के पास इसलिए जाता हूँ क्योंकि वे मुझसे बहुत प्यार करते हैं और मेरी हर समस्या का हल जल्दी निकाल देते हैं।

प्रश्न 2. क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी ने आपके साथ अन्याय किया हो? आपने उस स्थिति का सामना कैसे किया ?
उत्तर: हाँ, एक बार मेरे मित्र ने मेरे ऊपर झूठा चोरी का इलजाम लगाया था। वह मेरी ही पेंसिल को अपना बना रहा था और मुझे पूरी कक्षा में चोर-चोर बोल रहा था। घर जाकर मैंने अपनी माँ को बताया तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं, मैं उसे समझा दूँगी और तुम्हें दूसरी पेंसिल खरीदकर दे दूँगी ।

(विद्यार्थी स्वयं के अनुभव के आधार पर बता सकते हैं।)

पता लगाकर कीजिए

• “राजा ने आज्ञा दी कि सिंहासन को ले जाकर राजदरबार में रख दिया जाए ।”
सिंहासन एक विशेष प्रकार की भव्य कुर्सी हुआ करती थी जिस पर राजा-महाराजा बैठा करते थे। आज भी हम बैठने के लिए अनेक प्रकार की वस्तुओं का उपयोग करते हैं।

इनमें से कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इनका वर्णन कीजिए और यह भी लिखिए कि आपकी भाषा में इन्हें क्या कहते है।

 उत्तर:


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